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माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल यूजर्स के मना करने पर भी ट्रैक कर रही हैं उनका डाटा
माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल यूजर्स ट्रैक कर रही हैं डाटा

माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल यूजर्स के मना करने पर भी ट्रैक कर रही हैं उनका डाटा

Apr 15, 2026
10:03 am

क्या है खबर?

माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल पर कैलिफोर्निया में हुए एक ऑडिट में सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कंपनियां यूजर की प्राइवेसी से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रही हैं। वेबएक्सरे नाम की एक कंपनी ने यह जांच की, जिसमें कई वेबसाइट्स पर यूजर डाटा के इस्तेमाल को करीब से देखा गया और चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं, जो डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई चिंता भी पैदा करते हैं।

ट्रैकिंग

ऑप्ट-आउट के बाद भी जारी रही ट्रैकिंग

ऑडिट में सामने आया कि कई यूजर्स ने ट्रैकिंग से बाहर निकलने का विकल्प चुना था, फिर भी उनके ब्राउजर में कुकीज डाली गईं। करीब 55 प्रतिशत वेबसाइट्स ने ऐसा किया। गूगल ने 87 प्रतिशत मामलों में नियम नहीं माने, जबकि मेटा और माइक्रोसॉफ्ट भी काफी मामलों में पीछे नहीं रहे। इससे साफ होता है कि यूज़र की पसंद को कई बार नजरअंदाज किया जा रहा है और डाटा बिना अनुमति के इस्तेमाल हो रहा है।

कैलिफोर्निया

कैलिफोर्निया के कड़े नियम भी हुए कमजोर

कैलिफोर्निया में प्राइवेसी के लिए सख्त कानून बने हैं, जिनके तहत यूजर अपनी जानकारी के इस्तेमाल को रोक सकते हैं। इसके लिए GPC नाम का सिस्टम भी मौजूद है, जो वेबसाइट को सिग्नल भेजता है कि यूजर ट्रैकिंग नहीं चाहता है। रिपोर्ट में पाया गया कि कई कंपनियां इस सिग्नल को भी नजरअंदाज कर देती हैं और फिर भी कुकीज सेट करती रहती हैं, जिससे नियमों का असर और यूजर्स का भरोसा कम होता दिख रहा है।

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आरोप

कंपनियों ने आरोपों को बताया गलत

इन आरोपों पर कंपनियों ने अपनी सफाई दी है। गूगल ने कहा कि रिपोर्ट उनके सिस्टम को सही तरह नहीं समझती है। मेटा ने इसे गलत तरीके से पेश किया गया बताया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि कुछ कुकीज जरूरी कामों के लिए होती हैं। कंपनियों का कहना है कि वे नियमों का पालन करती हैं और यूजर्स की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही हैं और सुधार भी कर रही हैं, ताकि भरोसा बना रहे।

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अन्य

जुर्माने से नहीं रुक रही समस्या

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों पर पहले भी भारी जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन इससे ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। जानकारों का मानना है कि कंपनियां जुर्माना भर देती हैं और आगे बढ़ जाती हैं। वेबएक्सरे के अनुसार, इस समस्या का समाधान आसान हो सकता है, लेकिन इसके लिए सख्ती से नियम लागू करने और लगातार निगरानी रखने की जरूरत है, तभी यूजर्स की प्राइवेसी सही मायनों में सुरक्षित रह पाएगी।

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