माइक्रोन CEO ने 2028 तक चिप की कमी की जताई आशंका, क्या होगा इसका असर?
क्या है खबर?
मेमोरी चिप की कमी का असर कुछ सालों तक जारी रह सकता है। माइक्रोन और सैमसंग के अधिकारियों ने इस सप्ताह कहा कि मेमोरी की मांग उपलब्ध सप्लाई से ज्यादा बनी रह सकती है। माइक्रोन के CEO संजय मेहरोत्रा के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सर्वर के लिए मेमोरी की बढ़ती जरूरत से सप्लाई पर दबाव है। कंपनी 2028 में नए क्लीन रूम शुरू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन उत्पादन बढ़ने में समय लगेगा।
मांग
AI के लिए बढ़ रही मेमोरी की मांग
मेमोरी की कमी की बड़ी वजह AI का बढ़ता इस्तेमाल है।
AI सिस्टम के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और सर्वर में इस्तेमाल होने वाली DRAM की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता का हिस्सा इन चिप्स के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
सैमसंग के अधिकारी के मुताबिक, 2027 में HBM के लिए DRAM वेफर क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल हो सकता है, जो इस साल 20 प्रतिशत है।
असर
फोन और लैपटॉप हो सकते हैं महंगे
स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
मेमोरी की सप्लाई सीमित रहने से कंप्यूटर और मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसका असर आगे चलकर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
कुछ कंपनियां कीमत बढ़ा सकती हैं, जबकि कुछ महंगे मॉडल में भी कम RAM दे सकती हैं। पहले से बने PC की कीमतों में बढ़ोतरी और कम RAM वाले डिवाइस इसके संकेत दे रहे हैं।
अन्य
दूसरे गैजेट्स पर भी असर संभव
अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे हो सकते हैं।
मेमोरी चिप का इस्तेमाल फोन और लैपटॉप के अलावा गेमिंग कंसोल, स्ट्रीमिंग डिवाइस और दूसरे स्मार्ट गैजेट्स में भी होता है। अगर AI और डाटा सेंटर की मांग बढ़ती रही तो इन उत्पादों के लिए मेमोरी की उपलब्धता पर दबाव बना रह सकता है।
इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और बाजार में कुछ डिवाइस महंगे होने के साथ कम मेमोरी वाले विकल्प बढ़ सकते हैं।