मेटा का नया AI ब्रेन2क्वर्टी पढ़ेगा दिमाग की गतिविधि, बिना सर्जरी विचारों को बना देगा टेक्स्ट
क्या है खबर?
मेटा ने ब्रेन2क्वर्टी v2 नाम का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम पेश किया है, जो बिना किसी सर्जरी या ब्रेन चिप के दिमाग की गतिविधि को पढ़कर उसे टेक्स्ट में बदल सकता है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में लकवा, दिमागी चोट या बोलने में असमर्थ लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती है। इसकी मदद से लोग सिर्फ अपने विचारों के जरिए भी बातचीत कर सकेंगे। फिलहाल यह तकनीक रिसर्च चरण में है।
सिस्टम
क्या है ब्रेन2क्वर्टी v2 सिस्टम?
ब्रेन2क्वर्टी v2 मेटा का नया रिसर्च प्रोजेक्ट है, जिसे पिछले मॉडल का उन्नत वर्जन बताया जा रहा है। यह सिस्टम मैग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी (MEG) तकनीक का उपयोग करता है, जिसमें किसी तरह की सर्जरी या इम्प्लांट की जरूरत नहीं होती। इसके लिए सेंसर से लैस एक खास हेलमेट पहनाया जाता है, जो दिमाग से निकलने वाले बेहद हल्के चुंबकीय संकेतों को रिकॉर्ड करता है। इसके बाद AI उन संकेतों का विश्लेषण करके टेक्स्ट तैयार करता है।
काम
ऐसे काम करती है यह नई तकनीक
मेटा के अनुसार, यह सिस्टम सीधे दिमाग से मिलने वाले संकेतों का विश्लेषण करता है और AI की मदद से समझने की कोशिश करता है कि व्यक्ति क्या टाइप करना चाहता है। पहले वर्जन की तुलना में नया मॉडल एंड-टू-एंड डीप लर्निंग तकनीक का उपयोग करता है। कंपनी का कहना है कि इससे सिस्टम खुद पैटर्न पहचानता है और पहले से ज्यादा सटीक तरीके से शब्दों और वाक्यों को टेक्स्ट में बदल सकता है।
मदद
सटीकता बढ़ाने के लिए AI की मदद
कंपनी ने इस सिस्टम को नौ वालंटियर्स के लगभग 22,000 वाक्यों के डाटा पर प्रशिक्षित किया है। मेटा के अनुसार, नए मॉडल ने औसतन 61 प्रतिशत शब्दों की सही पहचान की, जबकि सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी के मामले में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी ने बड़े लैंग्वेज मॉडल का भी इस्तेमाल किया, ताकि कमजोर या अधूरे संकेत मिलने पर भी सही शब्द और वाक्य का अनुमान लगाया जा सके।
शोध
दूसरी कंपनियां भी कर रही हैं ऐसे शोध
मेटा का कहना है कि ब्रेन2क्वर्टी v2 उसके बड़े डिजिटल ब्रेन रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है। कंपनी का मानना है कि ज्यादा डाटा मिलने पर इसकी सटीकता और बेहतर हो सकती है। मेटा ने न्यूरोसाइंस रिसर्च के लिए पांच मिलियन डॉलर का फंड भी बनाया है। वहीं, एलन मस्क की न्यूरालिंक ब्रेन चिप पर काम कर रही है, जबकि दूसरी कंपनियां भी बिना सर्जरी वाले ऐसे सिस्टम विकसित करने की दिशा में शोध कर रही हैं।