2030 तक मेमोरी चिप्स की कमी रहने के आसार, माइक्रोन ने किए बड़े समझौते
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। AI कंपनियां बड़े डाटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं। इससे रैम और स्टोरेज चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे दुनिया की प्रमुख मेमोरी चिप कंपनी माइक्रोन ने 2030 तक के लिए कई बड़े ग्राहकों के साथ मेमोरी सप्लाई और कीमत तय करने वाले समझौते किए हैं।
समझौता
2030 तक सप्लाई और कीमतें तय करने का समझौता
माइक्रोन ने बताया कि उसने 16 बड़े रणनीतिक समझौते किए हैं, जो 2026 से 2030 तक लागू रहेंगे। इन समझौतों में मेमोरी चिप्स की तय मात्रा के साथ न्यूनतम और अधिकतम कीमत भी पहले से तय की गई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) संजय मेहरोत्रा ने कहा कि इससे माइक्रोन को बेहतर मुनाफा मिलेगा, जबकि ग्राहकों को भविष्य में कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने की स्थिति में भी कुछ सुरक्षा मिलेगी।
कमी
जल्द खत्म नहीं होगी मेमोरी चिप्स की कमी
माइक्रोन का कहना है कि मेमोरी चिप्स की कमी जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं है। कंपनी के अनुसार, नई फैक्ट्रियां बनने और उत्पादन बढ़ने में काफी समय लगता है। अभी AI डाटा सेंटर की मांग इतनी तेज है कि उपलब्ध उत्पादन उसे पूरा नहीं कर पा रहा। इसी कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत बढ़ रही है। हाल ही में ऐपल ने भी कई मैक और आईपैड मॉडल की कीमतें इसी वजह से बढ़ाई हैं।
कारोबार
22 अरब डॉलर के समझौते से बढ़ेगा कारोबार
माइक्रोन के नए समझौतों से कंपनी को करीब 22 अरब डॉलर (लगभग 2,100 अरब रुपये) का कारोबार मिलने की उम्मीद है। कंपनी ने बताया कि उसके ग्राहक क्लाउड कंपनियां, सर्वर निर्माता, वाहन निर्माता और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां हैं। माइक्रोन, एनवीडिया के AI प्रोसेसर के लिए बड़े स्तर पर मेमोरी चिप्स भी बनाती है। माइक्रोन, सैमसंग और SK हाइनिक्स इस समय दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल हैं।