नासा के अपोलो मिशन की सॉफ्टवेयर वैज्ञानिक मार्गरेट हैमिल्टन का 90 साल की उम्र में निधन
क्या है खबर?
नासा के अपोलो मिशन के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक मार्गरेट हैमिल्टन का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने उनकी मौत की पुष्टि की है। संस्थान के मुताबिक, हैमिल्टन का निधन 30 सितंबर को हुआ। उन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को एक अलग क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाने वाली प्रमुख हस्तियों में गिना जाता है। उन्होंने अपोलो मिशन की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी।
भूमिका
अपोलो 11 मिशन में निभाई अहम भूमिका
हैमिल्टन ने 1959 से MIT में काम किया और वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े विभाग का नेतृत्व किया।
उनकी टीम ने नासा के अपोलो 11 मिशन के लिए अंतरिक्ष यान में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को तैयार और जांचा था। इसी सॉफ्टवेयर ने नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन को चांद पर उतरने के दौरान जरूरी कंप्यूटर मदद दी।
हैमिल्टन उस समय इस क्षेत्र में काम करने वाली शुरुआती प्रोग्रामरों में शामिल थीं।
गड़बड़ी
कंप्यूटर में आई गड़बड़ी को संभाला
1969 में अपोलो 11 की चांद पर लैंडिंग से कुछ समय पहले अंतरिक्ष यान के कंप्यूटर ने चेतावनी दी थी।
कंप्यूटर पर एक साथ कई काम होने से वह दबाव में आ गया था, जिससे मिशन पर खतरा दिखने लगा। हैमिल्टन की टीम ने सॉफ्टवेयर इस तरह तैयार किया था कि ऐसी स्थिति में कम जरूरी काम रुक जाएं और लैंडिंग से जुड़े जरूरी काम चलते रहें।
इसी व्यवस्था ने मिशन को आगे बढ़ने में मदद की।
सम्मान
राष्ट्रपति सम्मान से भी नवाजी गईं
मार्गरेट हैमिल्टन का जन्म 1936 में इंडियाना में हुआ था।
उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी और अर्लहम कॉलेज से गणित की पढ़ाई की और 1958 में स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने अपना सॉफ्टवेयर कारोबार शुरू किया और हैमिल्टन टेक्नोलॉजीज की स्थापना की।
2016 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया था। उनके परिवार में बेटी, दामाद, दो पोते और चार परपोते हैं।