भारतीय कंपनी के 8 सुरक्षा प्रमाणपत्रों में बड़ी खामी, इंटरनेट पर लाखों सर्वर को खतरा
क्या है खबर?
इंटरनेट पर सुरक्षित तरीके से जानकारी भेजने वाली ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) व्यवस्था में गंभीर कमजोरी सामने आई है। भारत की प्रमाणन कंपनी ईमुद्रा लिमिटेड के 8 सुरक्षा प्रमाणपत्रों की निजी कीज बेहद कमजोर पाई गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका फायदा उठाकर हमलावर किसी भी वेबसाइट के नाम पर भरोसेमंद प्रमाणपत्र तैयार कर सकते थे। कई प्रमुख ब्राउजर और ऐप कंपनियों ने मंगलवार तक इन प्रमाणपत्रों को रोकने के कदम उठाए थे।
निजी कीज
कुछ ही कोशिशों में पता चल सकती थीं निजी कीज
सामान्य तौर पर TLS प्रमाणपत्रों की निजी कीज इतनी मजबूत होती हैं कि उनका अनुमान लगाना बेहद मुश्किल होता है।
ईमुद्रा के प्रभावित प्रमाणपत्रों में कीज की सुरक्षा क्षमता केवल 3 से 8 बिट के बराबर पाई गई। इससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इन कीज के जरिए ऐसे प्रमाणपत्र बनाए जा सकते थे, जिन्हें कई वेबसाइट और सर्वर असली मान सकते थे।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक इनके गलत इस्तेमाल का प्रमाण नहीं मिला है।
अपडेट
सभी उपकरणों तक सुरक्षा अपडेट पहुंचाना आसान नहीं
प्रभावित प्रमाणपत्रों को ब्राउजर में रोकने के बाद भी समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है।
पुराने कंप्यूटर, लिनक्स आधारित सिस्टम, डॉकर कंटेनर और इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को सुरक्षित करने के लिए अलग-अलग अपडेट जारी करने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञ फिलिपो वाल्सोर्डा ने इस काम को वर्ष 2014 में सामने आई हार्टब्लीड सुरक्षा खामी से भी बड़ी चुनौती बताया है। उस समय भी कई सर्वरों को अपडेट करने और पुराने प्रमाणपत्र बदलने में लंबा समय लगा था।
अन्य
हमलावरों को इंटरनेट ट्रैफिक तक पहुंच बनानी होगी
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन कमजोर प्रमाणपत्रों के जरिए हमला करने के लिए हमलावर को दो पक्षों के बीच होने वाले TLS से सुरक्षित इंटरनेट संचार में हस्तक्षेप करना होगा।
ऐसा करने पर वह भेजी जा रही जानकारी को पढ़ने की कोशिश कर सकता है। सार्वजनिक वाई-फाई या किसी संस्थान के स्थानीय नेटवर्क पर नियंत्रण रखने वाले हमलावरों के लिए यह जोखिम ज्यादा हो सकता है।
कई ब्राउजर ने प्रभावित प्रमाणपत्रों को रोक दिया है।