ISRO के दो अहम मिशन अटके, NVS-03 और GISAT-1A कर रहे मंजूरी का इंतजार
क्या है खबर?
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दो अहम सैटेलाइट लॉन्च फिलहाल सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने NVS-03 और GISAT-1A मिशन की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दोनों सैटेलाइट श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च के लिए तैयार हैं, लेकिन अंतिम अनुमति नहीं मिलने के कारण उड़ान नहीं भर सके हैं। इससे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली योजनाओं पर भी असर पड़ता दिख रहा है।
वजह
क्यों हो रही मिशन में देरी?
रिपोर्ट के अनुसार, मई, 2025 और जनवरी, 2026 में हुए दो PSLV मिशनों की विफलता के बाद सरकार अतिरिक्त सावधानी बरत रही है।
बताया गया कि एक GSLV MK-2 रॉकेट भी लॉन्च के लिए तैयार था, लेकिन अंतिम मंजूरी नहीं मिलने से प्रक्रिया रोक दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और समीक्षा खत्म होने तक किसी नए मिशन को हरी झंडी नहीं दी जा रही तथा सभी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जा रही है।
मिशन
NVS-03 और GISAT-1A क्यों हैं अहम?
NVS-03 भारत के दूसरी पीढ़ी के NavIC नेविगेशन सिस्टम का महत्वपूर्ण सैटेलाइट है।
इसके लॉन्च से देश की क्षेत्रीय नेविगेशन सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं GISAT-1A सैटेलाइट लगभग वास्तविक समय में धरती की तस्वीरें भेजने के लिए तैयार किया गया है।
इससे आपदा प्रबंधन, खेती, पर्यावरण की निगरानी, जंगलों पर नजर रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बेहतर सहायता मिल सकेगी तथा निगरानी क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
अन्य
मंजूरी मिलते ही शुरू होंगे दोनों मिशन
ISRO ने दोनों मिशनों की तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं और आवश्यक रॉकेट भी लॉन्च के लिए तैयार है।
अब एजेंसी अंतिम सरकारी मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। मंजूरी मिलते ही दोनों उपग्रहों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिशनों की सफलता भारत की नेविगेशन, पृथ्वी निगरानी और रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा भविष्य के कई मिशनों को भी गति मिलेगी।