ISRO ने निजीकरण की खबरों को किया खारिज, कहा- अंतरिक्ष मिशनों में भूमिका रहेगी मजबूत
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने निजीकरण और भूमिका कम होने से जुड़ी खबरों को गलत बताया है। रविवार (6 सितंबर) एजेंसी ने कहा कि स्पेस सेक्टर में किए जा रहे सुधारों का मकसद ISRO को निजी हाथों में देना नहीं है। ISRO ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। एजेंसी ने साफ किया कि वह भारत के स्पेस प्रोग्राम का मुख्य संस्थान बनी रहेगी और देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों की जिम्मेदारी संभालती रहेगी।
मामला
प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का है मामला
ISRO ने बताया कि स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सुधार किए गए हैं।
इसका मकसद ISRO की जिम्मेदारी खत्म करना नहीं, बल्कि उसे एडवांस्ड रिसर्च, नई तकनीक और बड़े अंतरिक्ष मिशनों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका देना है। वहीं, निजी कंपनियां तैयार तकनीकों का उत्पादन, व्यावसायिक इस्तेमाल और बड़े स्तर पर विस्तार कर सकेंगी।
एजेंसी ने कहा कि इसे निजीकरण नहीं, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए।
मिशन
एडवांस्ड मिशनों पर ISRO का रहेगा ध्यान
एजेंसी ने कहा कि ह्यूमन स्पेसफ्लाइट, अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, डीप-स्पेस और ग्रहों की खोज जैसे क्षेत्रों में उसकी भूमिका मजबूत होगी।
ISRO एडवांस्ड पेलोड, सेंसर और प्रोपल्शन सिस्टम जैसी जरूरी तकनीक भी विकसित करता रहेगा। वहीं, पहले से तैयार लॉन्च व्हीकल, नियमित सैटेलाइट और स्थापित सिस्टम के उत्पादन को उद्योग को दिया जा सकता है।
एजेंसी के अनुसार, इससे उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बदलाव
भारत के स्पेस विजन के लिए जरूरी बदलाव
ISRO ने बताया कि भारत में अब 450 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जो सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, प्रोपल्शन और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
देश की स्पेस इकॉनमी करीब 8.4 अरब डॉलर की है, जिसे 2033 तक 44 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है। एजेंसी ने कहा कि इस लक्ष्य के लिए सरकारी संसाधनों के साथ निजी निवेश और औद्योगिक क्षमता भी जरूरी होगी।
ISRO भारत के स्पेस विजन 2047 के केंद्र में बना रहेगा।