ISRO और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने पृथ्वी अवलोकन मिशन के लिए किया समझौता
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पृथ्वी अवलोकन मिशनों पर अपने सहयोग को मजबूत करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के साथ एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अंतरिक्ष एजेंसी ने बयान में कहा कि ESA-ISRO संयुक्त अंशांकन, सत्यापन गतिविधियों और पृथ्वी अवलोकन मिशनों के लिए वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित व्यवस्था को लेकर काम करेंगे। ISRO के वैज्ञानिक सचिव एम गणेश पिल्लई और ESA की पृथ्वी अवलोकन निदेशक सिमोनिटा चेली ने हस्ताक्षर किए।
गठजोड़
दोनों के बीच और मजबूत हुआ गठजोड़
यह नया समझौता ISRO और ESA के बीच दशकों पुरानी साझेदारी पर आधारित है, जिसकी शुरुआत 1978 में हुई थी और 2002 में इसका नवीनीकरण किया गया था। चेली ने आगामी पृथ्वी अवलोकन अभियानों विशेष रूप से फ्लेक्स (फ्लोरेसेंस एक्सप्लोरर) मिशन के लिए इस सहयोग के महत्व पर जोर दिया। भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक पिल्लई ने बताया कि दोनों एजेंसियों के बीच साझेदारी में पृथ्वी अवलोकन, नौवहन, ग्राउंड स्टेशन सहायता और मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।
फायदा
ISRO को इससे क्या होगा फायदा?
वैज्ञानिक सचिव ने चंद्रयान और आदित्य-L1 जैसे अंतरिक्ष अभियानों के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के समर्थन के साथ-साथ ISRO की डीप स्पेस एंटीना सुविधाओं के माध्यम से सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि इससे पृथ्वी अवलोकन मिशनों के लिए संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययनों और अंशांकन अभियानों को समर्थन मिलने की उम्मीद है। सिमोनिटा चेली ने कहा कि यह गठजोड़ वनस्पति जीवविज्ञान की समझ बेहतर बनाने और अंतरिक्ष से पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।