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भारतीय मूल के अनिल मेनन 8 महीने के अंतरिक्ष मिशन पर रवाना
भारतीय मूल के अनिल मेनन अंतरिक्ष के लिए रवाना

भारतीय मूल के अनिल मेनन 8 महीने के अंतरिक्ष मिशन पर रवाना

Jul 14, 2026
09:36 pm

क्या है खबर?

भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन लंबे अंतरिक्ष मिशन पर रवाना हो गए हैं। भारतीय समय के अनुसार मंगलवार रात 8:17 बजे उन्हें कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए लॉन्च किया गया। यह उनका पहला अंतरिक्ष मिशन है। वह करीब 8 महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध और प्रयोग करेंगे।

परिचय

दो साल तक चली मिशन की तैयारी

49 वर्षीय अनिल पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन डॉक्टर, अमेरिकी स्पेस फोर्स के कर्नल और नासा के पूर्व फ्लाइट सर्जन हैं।

वह 2014 में नासा से जुड़े और 2021 में अंतरिक्ष यात्री चुने गए। सोयुज MS-29 उनका पहला अंतरिक्ष मिशन है।

उन्होंने इस मिशन के लिए करीब दो साल तक कठिन प्रशिक्षण लिया और बताया कि अंतरिक्ष में टीम के साथ मिलकर काम करना, तय दिनचर्या का पालन करना और हर चुनौती का सामना करना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

शोध

आठ महीने तक करेंगे वैज्ञानिक शोध

अनिल ने रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और एना किकिना के साथ उड़ान भरी है।

लॉन्च के करीब तीन घंटे बाद सोयुज यान के ISS से जुड़ने की उम्मीद है। इसके बाद तीनों एक्सपीडिशन 74 और 75 मिशन का हिस्सा बनेंगे। इस दौरान अनिल अंतरिक्ष में कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

इन शोधों से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, नई तकनीकों और पृथ्वी पर चिकित्सा तथा विज्ञान के क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

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सहयोग

अमेरिका और रूस का सहयोग जारी

इस लॉन्च कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन भी मौजूद रहे।

इस मिशन के लिए उन्होंने रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के सहयोग की सराहना की है। अमेरिका और रूस के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद दोनों देश ISS मिशन में मिलकर काम कर रहे हैं।

दोनों देशों के बीच क्रू एक्सचेंज समझौता भी जारी है, जिसके तहत अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे के अंतरिक्ष यानों से मिशन पर जाते हैं।

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