भारत चाहता है एंथ्रोपिक के मिथोस AI मॉडल तक पहुंच, अमेरिका से चल रही बातचीत
क्या है खबर?
भारत सरकार अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत कर रही है, ताकि देश की कंपनियों को एंथ्रोपिक के उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल मिथोस तक पहुंच मिल सके। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ऐसा तरीका खोज रही है जिससे भारतीय कंपनियां इस तकनीक का बराबरी के आधार पर इस्तेमाल कर सकें। इसके साथ ही, यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि देश के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
चर्चा
अमेरिका और कंपनी के साथ जारी चर्चा
बताया गया है कि भारत, अमेरिकी अधिकारियों और एंथ्रोपिक कंपनी के साथ अलग-अलग स्तर पर बातचीत कर रहा है। इस मामले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय काफी सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने हाल ही में बैंकों, साइबर एजेंसियों और IT मंत्रालय के साथ बैठक कर इस विषय पर चर्चा की, जिससे इस मुद्दे को और गति मिली है।
निर्देश
सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश
भारत सरकार ने देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसियों को जरूरी सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कहा है। इसमें पावर ग्रिड, टेलीकॉम नेटवर्क और बैंकिंग सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे AI मॉडल भविष्य में बहुत ही बड़े स्तर पर साइबर खतरे पैदा कर सकते हैं, इसलिए पहले से तैयारी करना जरूरी है, ताकि किसी भी जोखिम को समय रहते रोका जा सके।
खासियत
मिथोस AI मॉडल क्यों है खास?
मिथोस AI मॉडल एंथ्रोपिक का नया सिस्टम है, जो सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को तेजी से पहचानने में सक्षम माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह हजारों कमजोरियों को ढूंढ सकता है, जो पहले के मॉडल से कहीं ज्यादा है। अभी तक इसका परीक्षण मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों के साथ किया गया है। भारत अब चाहता है कि उसकी कंपनियां भी इस उन्नत तकनीक का लाभ उठा सकें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ें।