भारत का पहला 80 टन का FFSC रॉकेट इंजन इस हफ्ते होगा लॉन्च
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ-साथ अब भारत की निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना कदम बढ़ा रही हैं। इसी कड़ी में भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी एस्ट्रो बेस अपना पहला पूरी तरह से एकीकृत 80 टन श्रेणी का फुल फ्लो स्टेज्ड कंबशन (FFSC) रॉकेट इंजन पेश करने की तैयारी में है। कंपनी 8 अगस्त को इस इंजन से पर्दा उठा सकती है। इससे देश की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमताओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इंजन
क्या है FFSC इंजन और क्यों है खास?
FFSC दुनिया की सबसे उन्नत रॉकेट इंजन तकनीकों में से एक मानी जाती है।
इसमें ईंधन और ऑक्सीकारक को मुख्य दहन कक्ष तक पहुंचने से पहले अलग-अलग चरणों से गुजारा जाता है। इससे इंजन अधिक ताकत, बेहतर ईंधन क्षमता और लंबी कार्यक्षमता हासिल करता है।
साथ ही इसके महत्वपूर्ण हिस्सों पर दबाव भी कम पड़ता है, जिससे प्रदर्शन बेहतर हो जाते हैं। यही वजह है कि इसे भविष्य की अंतरिक्ष उड़ानों के लिए बेहद अहम तकनीक माना जाता है।
फायदा
80 टन क्षमता से मिलेगा बड़ा फायदा
यह इंजन करीब 80 टन तक का थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम होगा, जिससे मध्यम क्षमता वाले रॉकेटों को उड़ान भरने में मदद मिलेगी।
जरूरत पड़ने पर ऐसे कई इंजनों को एक साथ जोड़कर बड़े लॉन्च व्हीकल भी तैयार किए जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यावसायिक अंतरिक्ष मिशनों, पुन: उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेटों और भविष्य की लॉन्च तकनीकों को नई मजबूती मिलेगी तथा विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी।
अन्य
8 अगस्त को मिल सकती हैं कई अहम जानकारियां
एस्ट्रो बेस ने अभी इंजन की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
कंपनी ने यह भी नहीं बताया है कि इस इंजन का इस्तेमाल किस रॉकेट में किया जाएगा। उम्मीद है कि 8 अगस्त को होने वाले आधिकारिक अनावरण के दौरान इंजन की क्षमता, तकनीक और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी।
यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है।