वित्त वर्ष 2031 तक भारत की डाटा सेंटर क्षमता 10.5 गीगावॉट तक पहुंचेगी
क्या है खबर?
वित्त वर्ष 2031 तक भारत की डाटा सेंटर क्षमता लगभग 6 गुना बढ़कर 1.8 गीगावाट से बढ़कर लगभग 10.5 गीगावाट होने का अनुमान है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और डाटा स्थानीयकरण नीतियों के कारण हो रही है। निवेश बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अकेले AI वर्कलोड अनुमानित क्षमता का लगभग 6.8 गीगावाट हिस्सा हो सकता है।
कारण
इन कारणों से बढ़ेगी डाटा सेंटर्स की क्षमता
रिपोर्ट में बताया है कि कम विलंबता वाली प्रोसेसिंग की बढ़ती मांग, सख्त स्थानीयकरण मानदंड और बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। भू-राजनीतिक बदलाव और भारत के नियामकीय प्रयासों से डाटा सेंटर्स में कई वर्षों के निवेश चक्र को बल मिल रहा है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि भूमि, विद्युत प्रणाली, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग उपकरण सहित डाटा सेंटर क्षमता में वृद्धि से संबंधित औद्योगिक पूंजीगत व्यय लगभग 60 अरब डॉलर (करीब 5,550 अरब रुपये) है।
निवेश
बिजली प्लांट्स के लिए होगी अधिक निवेश की जरूरत
रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ऊर्जा-गहन प्लांट्स को चलाने के लिए विद्युत पारिस्थितिकी तंत्र को 20 अरब डॉलर (करीब 1,850 अरब रुपये) से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी। ऑपरेटर तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण समाधानों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। डाटा स्थानीयकरण संबंधी प्रावधान, डाटा सेंटर्स के लिए बुनियादी ढांचे का दर्जा और वित्तीय प्रोत्साहन जैसे नीतिगत उपाय पूंजी निर्माण को गति दे रहे हैं।