2030 तक 6G लाने की तैयारी, 26 देशों के समूह में शामिल हुआ भारत
क्या है खबर?
भारत अब 6G नेटवर्क को लेकर अमेरिका की अगुवाई वाली एक अंतरराष्ट्रीय पहल का हिस्सा बन गया है। इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के नेटवर्क को सुरक्षित बनाने और अलग-अलग देशों की तकनीक के बीच बेहतर तालमेल तैयार करना है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत के इस समूह में शामिल होने की घोषणा की है। भारत के जुड़ने के बाद सरकारों की संख्या 26 हो गई है। यह कदम भारत की बढ़ती 6G तैयारियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती देता है।
मायने
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
इस पहल में शामिल होने से भारत को 6G नेटवर्क से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों और तकनीकी दिशा पर सहयोग करने का मौका मिलेगा।
सदस्य देश नेटवर्क सुरक्षा, आपसी तालमेल और मजबूत बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर साथ काम करेंगे। इसके अलावा, 6G नेटवर्क को विकसित और संचालित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी चर्चा होगी।
इससे भारत को भविष्य के वैश्विक 6G मानकों को तय करने वाली बातचीत में अपनी प्राथमिकताएं रखने का अवसर मिल सकता है।
मिशन
भारत का अपना 6G मिशन जारी
भारत अंतरराष्ट्रीय पहल में शामिल होने के साथ अपने घरेलू 6G कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है।
भारत 6G मिशन और भारत 6G अलायंस के जरिए देश में नई तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहा है। भारत 6G अलायंस ने 2030 तक देश में 6G तकनीक शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
भारत की योजना 6G से जुड़े पेटेंट, उत्पाद और किफायती दूरसंचार समाधान विकसित करके वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की भी है।
तारीख
अभी नहीं तय हुई लॉन्च की तारीख
अमेरिका की अगुवाई वाली इस पहल में शामिल होने के बावजूद भारत के लिए 6G नेटवर्क की शुरुआत को लेकर कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है।
घोषणा में किसी फंडिंग, व्यावसायिक परियोजना या स्पेक्ट्रम आवंटन की जानकारी भी नहीं दी गई। फिलहाल यह पहल नीतिगत सहयोग और आपसी चर्चा तक सीमित है।
उम्मीद है कि 2027 से 6G की तकनीकी विशिष्टताओं पर औपचारिक काम शुरू होगा। प्रसाद ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है।