AI ऐप की लत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा, अध्ययन में चला पता
भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ के एक नए अध्ययन से पता चला है कि रेप्लिका जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपेनियन ऐप्स लोगों की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने 1.57 लाख से ज्यादा यूजर रिव्यूज का विश्लेषण किया और पाया कि लोग इन AI असिस्टेंट से भावनात्मक रूप से जुड़ रहे हैं।
यह लगाव कभी-कभी इतना बढ़ जाता है कि यह एक तरह का नशा बन जाता है और इसका असर असली जिंदगी के रिश्तों पर पड़ता है, जिससे उनमें तनाव पैदा होता है।
कंपेनियन ऐप्स के लिए सुरक्षा उपायों की मांग
टीम ने 6 मुख्य चिंताएं सामने रखी हैं, जिनमें तकनीकी खराबी, पैसों की दिक्कतें, AI का गलत बर्ताव, प्राइवेसी की चिंताएं, सामाजिक अलगाव और मानसिक नुकसान शामिल हैं।
प्रोफेसर प्रदीप कुमार बताते हैं कि इन ऐप्स पर ज्यादा निर्भरता की वजह से इंसान अकेला महसूस कर सकता है। चित्रा गौतम का सुझाव है कि इनमें ऐसे नैतिक सुरक्षा उपाय जोड़े जाएं, जिससे ऐप्स की खूबियां किसी को गलत या नुकसानदेह निर्भरता के लिए बढ़ावा न दें।
शोधकर्ता चाहते हैं कि नियामक इन कंपेनियन ऐप्स को दूसरे काम करने वाले AI टूल से अलग तरीके से देखें। उनका कहना है कि अगर, इन पर सही से लगाम नहीं लगाई गई तो इसके खतरे बहुत ज्यादा हो सकते हैं।