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कैसे अंजाम दिया जा रहा है फास्टैग स्कैम? सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये तरीके
फास्टैग रीचार्ज के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी की जा रही है

कैसे अंजाम दिया जा रहा है फास्टैग स्कैम? सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये तरीके

Mar 22, 2026
03:08 pm

क्या है खबर?

डिजिटल टोल सिस्टम ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को आसान बना दिया है, लेकिन साइबर अपराधी अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इसके चलते फास्टैग रीचार्ज और वार्षिक पास के नाम पर ठगी हो रही है। जालसाज भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया या गूगल पर फर्जी विज्ञापन चलाते हैं। इस पर क्लिक करने से फर्जी वेबसाइट खुलती है। आइये जानते हैं फास्टैग स्कैम कैसे चलाया जा रहा है।

झांसा 

ऐसे दिया जा रहा झांसा 

यह एक तरह की ऑनलाइन ठगी है, जिसमें साइबर अपराधी फास्टैग रीचार्ज या वार्षिक पास पर भारी छूट का लालच देकर लोगों को फर्जी वेबसाइट या लिंक पर ले जाते हैं। ये वेबसाइट इस तरह डिजाइन की जाती हैं कि अधिकारिक जैसी ही लगती हैं। इसलिए, लोग इसके झांसे में आ जाते हैं। इसके जरिए पैसे ठग लेते हैं। जालसाज फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड के बहाने इस स्कैम में लोगों को फंसाते हैं।

तरीका 

इस तरह से की जाती है ठगी

इसके लिए साइबर ठग NHAI के नाम और लोगो का दुरुपयोग करते हैं, जिससे वेबसाइट असली दिखती है। जैसे ही यूजर फर्जी वेबसाइट पर वाहन नंबर, मोबाइल नंबर और पेमेंट डिटेल दर्ज करता है तो पैसे ठगों के खाते में चले जाते हैं। इससे न तो रीचार्ज होता है और न ही वार्षिक पास जारी होता है। इसके अलावा आपके खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं। इसके अलावा आपकी दी गई जानकारी चोरी हो सकती है।

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बचाव 

इस तरह से कर सकते हैं बचाव 

फास्टैग से जुड़े किसी भी काम के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें और किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। गूगल पर न तो कोई हेल्पलाइन नंबर सर्च करें और न ही ऊपर दिखने वाले हर लिंक पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले छूट के ऑफर पर भरोसा न करें, बैंक की जानकारी, OTP और CVV किसी को शेयर न करें। भुगतान करने के बाद ट्रांजैक्शन मैसेज जांचें और शक होने पर बैंक से संपर्क करें।

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क्या करें?

स्कैम होने के बाद क्या करें?

अगर, आपके साथ ठगी हो जाए तो सबसे पहले अपने बैंक या पेमेंट ऐप से संपर्क करें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करवाएं। साथ ही नेटबैंकिंग का पासवर्ड, UPI पिन और अन्य लॉग-इन जानकारी बदल दें, ताकि आगे कोई अनधिकृत लेन-देन न हो सके। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अगर, ठगी फर्जी कॉल, SMS या नकली वेबसाइट के माध्यम से हुई है तो उसकी जानकारी sancharsaathi.gov.in पर शेयर करें।

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