चीन का जुके-3 रीयूजेबल रॉकेट स्पेस-X के फाल्कन-9 से कैसे है अलग?
क्या है खबर?
चीन की निजी अंतरिक्ष कंपनी लैंडस्पेस ने रॉकेट तकनीक में बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी के जुके-3 रॉकेट का पहला हिस्सा अंतरिक्ष में सैटेलाइट पहुंचाने के बाद सफलतापूर्वक धरती पर वापस उतर गया है। 19 अगस्त, 2026 को हुए इस परीक्षण में रॉकेट के दूसरे हिस्से ने होंघु-03 सैटेलाइट को कक्षा में पहुंचाया। इसके बाद पहला हिस्सा नियंत्रित तरीके से वापस लौटा और बिना किसी बड़ी दिक्कत के गांसु प्रांत में तय जगह पर सफलतापूर्वक उतर गया।
अंतर
जुके-3 और फाल्कन-9 के ईंधन अलग
जुके-3 में तरल मीथेन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है।
इसके पहले हिस्से में नौ इंजन लगे हैं। वहीं स्पेस-X के फाल्कन-9 में केरोसीन आधारित RP-1 ईंधन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता है। दोनों रॉकेटों में तरल ऑक्सीजन ईंधन को जलाने में मदद करती है।
मीथेन आधारित इंजन को भविष्य के लिए उपयोगी माना जाता है, जबकि फाल्कन-9 का ईंधन सिस्टम कई वर्षों से सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है और काफी परखा जा चुका है।
ईंधन
वापसी की तकनीक में क्या अंतर है?
जुके-3 का पहला हिस्सा अलग होने के बाद इंजन को दोबारा चलाकर अपनी गति कम करता है और नियंत्रित तरीके से धरती की ओर लौटता है। इसके लैंडिंग पैर खुलते हैं और रॉकेट जमीन पर उतरता है।
फाल्कन-9 भी अलग होने के बाद अपने इंजन की मदद से गति और दिशा नियंत्रित करता है, फिर लैंडिंग पैरों पर उतरता है। फर्क यह है कि फाल्कन-9 की वापसी तकनीक को सैकड़ों उड़ानों में लगातार इस्तेमाल और बेहतर किया जा चुका है।
इस्तेमाल
स्पेस-X के पास दोबारा इस्तेमाल का लंबा अनुभव
लैंडस्पेस ने अभी पहली बार अपने कक्षा स्तर के बूस्टर को सफलतापूर्वक वापस उतारा है।
वहीं स्पेस-X वर्षों से फाल्कन-9 के पहले हिस्सों को उतारकर उनकी जांच और मरम्मत के बाद दोबारा इस्तेमाल कर रहा है। जुलाई में एक फाल्कन-9 बूस्टर अपनी 36वीं उड़ान पूरी कर चुका था।
इसलिए दोनों की मूल सोच समान होने के बावजूद अनुभव में बड़ा अंतर है। लैंडस्पेस को अब सुरक्षित लैंडिंग के साथ बार-बार इस्तेमाल की क्षमता साबित करनी होगी।
अन्य
चीन तेजी से कम कर रहा तकनीकी अंतर
चीन में दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेटों पर तेजी से काम बढ़ रहा है।
जुलाई में लॉन्ग मार्च-10B का पहला हिस्सा समुद्र में सफलतापूर्वक वापस लाया गया था। अब लैंडस्पेस ने जुके-3 को जमीन पर उतारा है। कंपनी इस बूस्टर को 20 बार तक इस्तेमाल करने की योजना बना रही है और छह महीने के भीतर इसे फिर उड़ाने का लक्ष्य रखती है।
योजना सफल होती है, तो चीन की निजी अंतरिक्ष कंपनियां स्पेस-X के काफी करीब पहुंच सकती हैं।