ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कैसे चलते हैं रोवर? नासा की इस खास स्प्रिंग में छिपा है राज
क्या है खबर?
नासा के मंगल मिशनों को सफल बनाने में एक खास तरह की स्प्रिंग का बड़ा योगदान रहा है। ब्रिटेन की जॉन इवांस संस कंपनी ने नासा के क्यूरियोसिटी और पर्सिवियरेंस रोवर के लिए इस कॉन्सटेंट फोर्स स्प्रिंग का निर्माण किया था। ये दोनों रोवर कई वर्षों से मंगल ग्रह की चट्टानों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन सतह पर लगातार सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। ऐसे में इस स्प्रिंग को इन दोनों मिशनों की सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
स्प्रिंग
क्या है यह स्प्रिंग और क्यों है इतनी खास?
क्यूरियोसिटी और पर्सिवियरेंस रोवर में लगे स्प्रिंग को 'कॉन्सटेंट फोर्स स्प्रिंग' कहा जाता है, जो एक विशेष प्रकार की स्प्रिंग होती है।
इसे लगातार एक समान दबाव और ताकत बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता है। यह रोवर के सस्पेंशन सिस्टम का अहम हिस्सा है और चट्टानों, गड्ढों तथा ऊंची-नीची सतह पर भी रोवर का संतुलन बनाए रखती है।
मंगल जैसी कठिन परिस्थितियों में बिना रुकावट काम करने के कारण इसे बेहद खास और भरोसेमंद तकनीक माना जाता है।
खासियत
आम स्प्रिंग से कैसे अलग होती है?
यह स्प्रिंग सामान्य स्प्रिंग की तरह केवल दबाव पड़ने पर काम नहीं करती, बल्कि पूरे समय लगभग समान ताकत बनाए रखती है।
इसके निर्माण में खास धातु, सटीक डिजाइन और कई कड़ी परीक्षण प्रक्रिया अपनाई जाती है।
पर्सिवियरेंस मिशन के लिए जॉन इवांस संस ने नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के साथ मिलकर इसकी डिजाइन, सामग्री का चयन, परीक्षण और निर्माण किया, ताकि यह मंगल के कठिन वातावरण में लंबे समय तक भरोसेमंद तरीके से काम कर सके।
काम
आज भी मंगल पर सफलतापूर्वक कर रहे हैं काम
क्यूरियोसिटी और पर्सिवियरेंस दोनों रोवर कई वर्षों से मंगल ग्रह पर लगातार वैज्ञानिक जानकारी जुटा रहे हैं।
जॉन इवांस संस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड डेवो कहते हैं कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि उनके बनाए स्प्रिंग आज भी मंगल पर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।
बता दें, अंतरिक्ष मिशनों में किसी भी पुर्जे की मरम्मत संभव नहीं होती, इसलिए हर उपकरण का पूरी तरह भरोसेमंद होना बेहद जरूरी होता है।