Loading...
AI के कारण कैसे बढ रहा है साइबर अपराध का खतरा?
फिशिंग अब भी सबसे बड़ा साइबर खतरा बना हुआ है

AI के कारण कैसे बढ रहा है साइबर अपराध का खतरा?

Aug 03, 2026
08:35 pm

क्या है खबर?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक आने के बाद, जहां बहुत से काम लोगों के लिए आसान हो गए हैं। वहीं, इसका एक खतरनाक पहलू भी अब सामने आने लगा है। जे. पी. मॉर्गन एसेट एंड वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, AI के कारण साइबर अपराध का खतरा काफी अधिक बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई तकनीक का गलत इस्तेमाल करके हैकर पहले से ज्यादा तेजी से लोगों और कंपनियों को निशाना बना रहे हैं।

खतरा

AI की वजह से कैसे बढ़ रहा है खतरा?

AI की मदद से अब साइबर अपराधी बहुत कम समय में किसी सॉफ्टवेयर, वेबसाइट या ऐप की कमजोरियां खोज सकते हैं।

पहले जिन कामों में कई दिन या हफ्ते लगते थे, अब वे कुछ ही समय में पूरे हो रहे हैं।

इससे फर्जी वेबसाइट बनाना, फिशिंग मैसेज तैयार करना, पासवर्ड चुराने की कोशिश करना और ऑनलाइन ठगी को अंजाम देना पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज हो गया है, जिससे आम लोग भी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

रिपोर्ट

रिपोर्ट में साइबर हमलों को लेकर क्या कहा गया?

जे. पी. मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, किसी सॉफ्टवेयर की कमजोरी सामने आने और उसका गलत फायदा उठाने के बीच का समय अब औसतन केवल एक दिन रह गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025 के दौरान दुनियाभर में साइबर हमले 18 प्रतिशत बढ़े और हर घंटे करीब 75,000 साइबर अटैक दर्ज किए गए।

फिशिंग अब भी सबसे बड़ा साइबर खतरा बना हुआ है और इससे सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं।

ADVERTISEMENT

सलाह

कंपनियों को सलाह

AI खतरा बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा मजबूत करने में भी मदद कर सकता है। इसी तकनीक की मदद से सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का जल्दी पता लगाकर उन्हें ठीक किया जा सकता है।

कंपनियों को तेजी से सुरक्षा अपडेट और सॉफ्टवेयर पैच जारी करने होंगे। साथ ही केवल सही समाधान नहीं, बल्कि तेजी से कार्रवाई करना भी अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है, ताकि साइबर हमलों का जोखिम कम किया जा सके।

ADVERTISEMENT

सुरक्षा

साइबर अपराध से ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा अपने मोबाइल, लैपटॉप और सभी ऐप्स को समय-समय पर अपडेट रखें।

किसी भी अनजान लिंक, ईमेल या मैसेज पर बिना जांच किए क्लिक नहीं करना चाहिए। मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

इसके साथ ही बैंकिंग या निजी जानकारी केवल भरोसेमंद वेबसाइट और आधिकारिक ऐप पर ही साझा करें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके और आपकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रह सके।

ADVERTISEMENT