क्यों गुजरात हाई कोर्ट ने मेटा, गूगल, एक्स को जारी किया नोटिस?
क्या है खबर?
गुजरात हाई कोर्ट ने मेटा, गूगल, एक्स, रेडिट और स्क्रिब्ड जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियों को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के निर्माण और वितरण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग के खिलाफ एक मजबूत नियामक ढांचा बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) के जवाब में की गई है। अदालत ने इन कंपनियों को 8 मई तक जवाब देने को कहा है। इससे इन कंपनियों की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है।
आदेश
अदालत ने क्या दिया निर्देश?
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायधीश डी एन रे की खंडपीठ ने संबंधित मध्यस्थों को सहयोग पोर्टल लाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार अवैध कंटेंट को हटाने के लिए बेहतर समन्वय और समय पर कार्रवाई करना है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि "संबंधित मध्यस्थों की प्रभावी और सार्थक प्रतिक्रिया/कार्रवाई वैधानिक ढांचे के तहत उन पर लागू उचित सावधानी दायित्वों के लिए महत्वपूर्ण होगी।"
अनुपालना
टेक कंपनियों की अनुपालना पर सरकार का रुख
केंद्र और गुजरात सरकारों ने अपने हलफनामों में बार-बार होने वाली देरी, प्रक्रियात्मक बाध्यताओं के उल्लंघन और कुछ तकनीकी प्लेटफाॅर्म्स द्वारा वैध नोटिसों का पालन न करने का मुद्दा उठाया। केंद्र ने अवैध कंटेंट के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के लिए अक्टूबर, 2024 में सहयोग पोर्टल लॉन्च किया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि मेटा और गूगल जैसे कुछ मध्यस्थों ने अनुपालन संबंधी कार्यों में सुधार किया है, जबकि एक्स जैसे अन्य मध्यस्थ पोर्टल के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ पाए।
याचिका
याचिका में क्या लगाया आरोप?
विकास नायर द्वारा दायर जनहित याचिका में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर AI से निर्मित वीडियो के अंधाधुंध निर्माण और प्रसार पर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने तर्क दिया कि ये सार्वजनिक व्यवस्था और स्वस्थ लोकतंत्र के संचालन के लिए गंभीर खतरा हैं। याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा डीपफेक/कृत्रिम/डिजिटल रूप से हेरफेर किए गए AI से बने मीडिया कंटेंट के खिलाफ विशिष्ट कानून या नियामक तंत्र बनाने में निष्क्रियता की भी आलोचना की।