साइबर ठगी रोकने के लिए सरकार ने बनाया नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, कैसे करेगा यह काम?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते साइबर ठगी के मामलों को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने RBI के साथ मिलकर इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन (IDPIC) बनाया है। यह नया प्लेटफॉर्म बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ तुरंत जानकारी साझा करेगा, ताकि साइबर ठगी के मामलों को समय रहते रोका जा सके और लोगों के पैसे सुरक्षित रह सकें तथा डिजिटल लेनदेन पर भरोसा भी बढ़े।
काम
कैसे करेगा यह काम?
वित्त मंत्री ने बताया कि IDPIC आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और बिग डाटा जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करेगा।
यह संदिग्ध लेनदेन और धोखाधड़ी से जुड़े संकेतों की तुरंत पहचान करेगा।
इसके बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों को रियल टाइम अलर्ट भेजे जाएंगे, ताकि वे समय रहते जरूरी कार्रवाई कर सकें और ग्राहकों को साइबर ठगी से बचाया जा सके तथा संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सके।
लाभ
बैंकों को तुरंत मिलेगी जरूरी जानकारी
सरकार के अनुसार, नया सिस्टम अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी तेजी से साझा करेगा।
इससे किसी नए साइबर हमले या संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही सभी संबंधित संस्थानों को तुरंत सूचना मिल सकेगी।
सरकार का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों पर तेजी से कार्रवाई करने, नुकसान कम करने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी तथा ग्राहकों का विश्वास भी लगातार मजबूत होगा।
एजेंसियां
CERT-In समेत कई एजेंसियां भी सक्रिय
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
CERT-In के तहत वित्तीय क्षेत्र के लिए विशेष साइबर सुरक्षा टीम भी बनाई गई है, जो साइबर घटनाओं की निगरानी, विश्लेषण, चेतावनी जारी करने और जवाबी कार्रवाई में मदद करेगी।
इसके अलावा, विभिन्न नियामकों, बैंकिंग संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर भी सुरक्षा व्यवस्था को लगातार और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।