EOS-05 सैटेलाइट ने GEO के रास्ते में पूरी की अहम प्रक्रिया, जानिए क्या है यह मिशन
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट EOS-05 ने हाल ही में अंतरिक्ष में एक अहम प्रक्रिया पूरी की है। इसने धरती की जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट की ओर बढ़ते हुए ऑर्बिट बदलने का एक अहम काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सैटेलाइट को शुक्रवार (4 सितंबर) की सुबह अंतरिक्ष एजेंसी के सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के जरिए जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में भेजा गया था। यह सैटेलाइट अब जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GEO) की ओर बढ़ रहा है।
प्रगति
36,000 किलोमीटर दूर पहुंचेगा सैटेलाइट
5 सितंबर को 1.5 घंटे तक इंजन चलाने के बाद EOS-05 ने अपना रास्ता बदल लिया है और अगले कुछ दिनों में अपनी तय जगह पर पहुंच जाएगा।
GTO से सैटेलाइट अपने इन-बिल्ट प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके ऊंची कक्षाओं (ऑर्बिट्स) में आगे बढ़ेगा और अंततः 36,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अपने तय GEO तक पहुंचेगा।
जहां यह इतनी ऊंचाई पर देश का पहला इमेजिंग सैटेलाइट बनेगा। वहां पहुंचने के बाद यह पृथ्वी पर नजर रख सकेगा।
फायदा
मिशन का क्या होगा फायदा?
EOS-05 के सफल लॉन्च से भारत की पृथ्वी पर लगातार नजर रखने की क्षमता बढ़ सकती है।
सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल मौसम की निगरानी, प्राकृतिक आपदाओं पर नजर और समुद्री क्षेत्रों की जानकारी जुटाने में किया जा सकता है।
हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों से जमीन और सीमावर्ती इलाकों की निगरानी भी बेहतर हो सकती है। करीब 2,367 किलोग्राम वजन वाला यह सैटेलाइट भारत के बड़े अर्थ ऑब्जर्वेशन पेलोड में शामिल है।