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टेंपल की ब्रेनफ्लो टीम में कौन-कौन है शामिल? दीपिंदर गोयल ने बताया
दीपिंदर गोयल ने बताई टेंपल की ब्रेनफ्लो टीम

टेंपल की ब्रेनफ्लो टीम में कौन-कौन है शामिल? दीपिंदर गोयल ने बताया

Sep 28, 2026
05:21 pm

क्या है खबर?

जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने हेल्थ और लंबी उम्र से जुड़ी कंपनी टेंपल की एक नई तकनीक के बारे में जानकारी साझा की है। कंपनी ने ब्रेनफ्लो नाम का वियरेबल सिस्टम तैयार किया है, जिसे दिमाग में ब्लड फ्लो लगातार मापने के लिए बनाया गया है। गोयल के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर अलग-अलग संस्थानों से जुड़े शोधकर्ताओं ने काम किया है। टीम ने इस तकनीक को तैयार करने के साथ इसकी शुरुआती जांच भी की है।

टीम

टीम में कौन-कौन शामिल?

ब्रेनफ्लो प्रोजेक्ट पर काम करने वाली टीम में IISc से डॉ. दिव्या गुलाटी और डॉ. संचित गुप्ता शामिल हैं।

इसके अलावा, इटली की SISSA ट्राइस्टे से डॉ. युक्ति चोपड़ा और IIT बॉम्बे से नीतीश कुमार भी इस टीम का हिस्सा हैं।

गोयल के मुताबिक, इन शोधकर्ताओं ने दिमाग में ब्लड फ्लो की लगातार निगरानी करने वाली तकनीक को तैयार करने और उसकी जांच करने में अहम भूमिका निभाई है।

ब्लड फ्लो

लगातार ब्लड फ्लो मापेगा

ब्रेनफ्लो का मकसद दिमाग में होने वाले ब्लड फ्लो को लगातार मापना है।

गोयल के अनुसार, शरीर में पहुंचने वाले कुल ब्लड का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दिमाग तक जाता है और उम्र बढ़ने के साथ इसमें बदलाव हो सकते हैं। अभी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कई तरीकों से ब्लड फ्लो की जानकारी अलग-अलग समय पर मिलती है।

नई तकनीक लगातार निगरानी के जरिए समय के साथ होने वाले बदलावों का डाटा जुटाने में मदद कर सकती है।

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परीक्षण

60 लोगों पर हुआ परीक्षण

ब्रेनफ्लो को लेकर यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह वास्तव में दिमाग के अंदर ब्लड फ्लो मापता है या केवल सिर की त्वचा में होने वाले बदलाव पकड़ता है।

गोयल के मुताबिक, टेंपल ने इसकी जांच के लिए टाइम-डोमेन नियर-इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया। इसकी तुलना ब्रेनफ्लो से की गई और परीक्षण में 60 लोग शामिल हुए।

हालांकि, अभी इस अध्ययन के पूरे नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

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फायदा

आगे रिसर्च में मिल सकता फायदा

ब्रेनफ्लो प्रोजेक्ट में न्यूरोसाइंस, ब्रेन इमेजिंग और दिमाग से जुड़ी दूसरी तकनीकों पर काम करने वाले शोधकर्ता शामिल हैं।

लगातार दिमागी ब्लड फ्लो की निगरानी से रिसर्चर्स को समय के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को समझने के लिए ज्यादा जानकारी मिल सकती है। कंपनी इस तकनीक को स्वस्थ उम्र बढ़ने से जुड़ी रिसर्च के लिए आगे बढ़ा रही है।

हालांकि, इसके स्वास्थ्य संबंधी वास्तविक फायदे जानने के लिए आगे और रिसर्च और क्लिनिकल जांच जरूरी होगी।

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