भारत में कमजोर पड़ रही चीनी मोबाइल कंपनियां, बिक्री में क्यों आई बड़ी गिरावट?
क्या है खबर?
भारत के स्मार्टफोन बाजार में जून तिमाही के दौरान चीनी कंपनियों की पकड़ और कमजोर हो गई। काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के बाद पहली बार इन ब्रांडों का संयुक्त बाजार हिस्सा सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बढ़ती कीमतों और कमजोर मांग के कारण कई ग्राहकों ने नया स्मार्टफोन खरीदने का फैसला टाल दिया। इसका असर सबसे ज्यादा कम कीमत वाले स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनियों की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी पर देखने को मिला है।
गिरावट
पूरे बाजार में दर्ज हुई बड़ी गिरावट
काउंटरपॉइंट रिसर्च की नई रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में भारत में कुल स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घट गई।
यह पिछले छह वर्षों की जून तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां शिपमेंट में 45 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई।
बढ़ती कीमतों और कमजोर मांग को इसकी मुख्य वजह माना गया है।
वजह
क्यों कम हुई बिक्री?
रिपोर्ट के मुताबिक, ओप्पो, वीवो, शाओमी, रियलमी, वनप्लस, IQ और पोको जैसे ब्रांडों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण बजट सेगमेंट की मांग कमजोर पड़ गई। इसी वजह से कई कंपनियों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फिर से कम कीमत वाले 4G स्मार्टफोन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया।
हालांकि, 5G स्मार्टफोन को भविष्य की बड़ी उम्मीद माना जा रहा है।
प्रीमियम
सैमसंग और प्रीमियम फोन रहे मजबूत
पूरे बाजार में गिरावट के बावजूद सैमसंग ने इस तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया और शिपमेंट में बढ़ोतरी दर्ज की है।
वहीं प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग भी मजबूत बनी रही, क्योंकि आसान EMI और फाइनेंसिंग योजनाओं से महंगे फोन खरीदना पहले की तुलना में आसान हुआ।
रिपोर्ट में बताया गया कि आईफोन की मांग काफी अच्छी रही, लेकिन सप्लाई की कमी के कारण बिक्री उम्मीद के अनुसार नहीं बढ़ सकी।
दबाव
आगे भी रह सकता है बाजार पर दबाव
आने वाले कुछ महीनों में भी स्मार्टफोन बाजार पर इसी तरह का दबाव बना रह सकता है।
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और महंगाई की वजह से कंपनियों के लिए कीमतें कम रखना आसान नहीं होगा। पूरे साल स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 13 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
ऐसे में कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए नए ऑफर और फाइनेंसिंग विकल्पों पर अधिक जोर दे सकती हैं।