LOADING...
चंद्रयान-4 मिशन शिव शक्ति पॉइंट के पास उतरेगा, वैज्ञानिकों ने पता लगाया सुरक्षित स्थान
चंद्रयान-4 मिशन के उतरने के लिए सुरक्षित स्थान का चयन किया गया है

चंद्रयान-4 मिशन शिव शक्ति पॉइंट के पास उतरेगा, वैज्ञानिकों ने पता लगाया सुरक्षित स्थान

Feb 07, 2026
03:49 pm

क्या है खबर?

भारत का चंद्रयान-4 के तहत चंद्रमा से नमूने लाने वाला प्रस्तावित मिशन दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थित एक पर्वतीय क्षेत्र शिव शक्ति पॉइंट में उतर सकता है। दक्षिणी ध्रुव पर 2 गड्ढों के बीच स्थित इस क्षेत्र को इसलिए चुना गया है, क्योंकि इसके छायादार क्षेत्रों में बर्फीली जल सामग्री छिपी हो सकती है। यह जानकारी भारत के चंद्र ऑर्बिटर से प्राप्त उच्च-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों पर आधारित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आई है।

पहचान 

ऐसे की गई उपयुक्त स्थान की पहचान 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के लिए ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे ऑर्बिटर हाई रिजॉल्यूशन कैमरा (OHRC) से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग किया। यह कैमरा चंद्रमा की सतह को लगभग 32cm/पिक्सेल के रिजॉल्यूशन पर कैप्चर कर सकता है। इससे शोधकर्ताओं को छोटे गड्ढों, चट्टानों और सूक्ष्म ढलानों का पता लगाने में मदद मिलती है, जो लैंडर के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। निष्कर्ष चंद्र और ग्रह विज्ञान सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए।

खासियत 

क्या है चयनित किए स्थान की खासियत?

अध्ययन से इस क्षेत्र में 4 संभावित लैंडिंग जोन का गहन अध्ययन किया गया। इनमें से MM-4 नामक स्थल सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आया। विश्लेषण के अनुसार, MM-4 में अपेक्षाकृत कम ढलान हैं, जिनका औसत लगभग 5 डिग्री है, बड़े-बड़े शिलाखंड, कम गड्ढे और लैंडिंग के लिए उपयुक्त समतल क्षेत्र हैं। इस स्थल पर मिशन की गतिविधियों के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश भी मिलता है, जो अंतरिक्ष यान को ऊर्जा प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

Advertisement

चंद्रयान-4

क्या है चंद्रयान-4 मिशन?

चंद्रयान-4 भारत का पहला ऐसा मिशन बनने की उम्मीद है, जो चंद्रमा से नमूने एकत्र करके उन्हें पृथ्वी पर वापस लाएगा। यह 2023 में चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद एक जटिल तकनीकी कदम है। ऐसे मिशन के लिए सही लैंडिंग स्थल का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतरिक्ष यान को सुरक्षित रूप से उतरना होगा, नमूने एकत्र करने होंगे और बाद में चंद्रमा की सतह से प्रक्षेपण करना होगा।

Advertisement