कैम्ब्रिज के नए रिसर्च हब में इंसानी टिश्यू से बनेगी भविष्य की दवाएं
कैम्ब्रिज में 2 करोड़ पाउंड (करीब 250 करोड़ रुपये) की लागत से एक नया रिसर्च हब खोला जा रहा है। इसका मुख्य काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नई दवाइयां बनाना होगा।
मेडिकल रिसर्च काउंसिल के सहयोग से शुरू हो रहा यह प्रोजेक्ट इलाज के नए तरीकों को तेजी से विकसित करने में मदद करेगा। इसकी मदद से जानवरों पर होने वाले परीक्षणों को भी कम किया जा सकेगा क्योंकि इसमें इंसानी टिश्यू मॉडल्स का उपयोग होगा। यह टीम कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि उनकी रिसर्च जमीनी और व्यावहारिक हो सके।
हब AI और ऑर्गेनोइड्स का इस्तेमाल करेगा
इस हब में AI, स्टेम सेल्स और ऑर्गेनोइड्स (लैब में तैयार किए गए छोटे अंग) का इस्तेमाल किया जाएगा। इनका मकसद बीमारियों को बेहतर ढंग से समझना और नए इलाज को परखना है।
हब के को-लीडर और CUH में मानद सलाहकार प्रोफेसर मथियास जिलबोअर बताते हैं कि मरीज-विशिष्ट इंसानी मॉडल्स के उपयोग से शुरुआती जांच कहीं ज्यादा सटीक हो पाएगी। वे वेलकॉम सेंगर इंस्टीट्यूट और रॉयल पैपवर्थ हॉस्पिटल NHS फाउंडेशन ट्रस्ट जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
उनका लक्ष्य ऐसी थेरेपी विकसित करना है, जो इंसानों के लिए ज्यादा प्रभावी हों और दवा बनाने में लगने वाले समय और खर्च दोनों की बचत करें।