भारत में कॉलर-ID ऐप्स को टेलीकॉम कंपनियों को देनी होगी स्पैम रिपोर्ट, ट्रूकॉलर ने किया विरोध
क्या है खबर?
भारत ने अपने स्पैम-रोधी नियमों काे सख्त बनाते हुए हुए कॉलर-ID और कॉल-मैनेजमेंट ऐप्स को भी यूजर्स की स्पैम रिपोर्ट दूरसंचार ऑपरेटर्स के साथ साझा करने के लिए बाध्य कर दिया है। अब ये ऐप्स यूजर्स को कॉल्स को स्पैम या जंक के तौर पर मार्क करने की सुविधा तब तक नहीं दे पाएंगे, जब तक कि वे टेलीकॉम ऑपरेटर्स के बनाए गए डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) प्लेटफॉर्म के साथ डाटा शेयर न करें।
बदलाव
TRAI ने नियमों में किया बदलाव
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने वाणिज्यिक संचार से संबंधित नियमों में संशोधन किया है।
TRAI का कहना है कि इस बदलाव का मकसद स्पैमर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए उपलब्ध स्पैम रिपोर्ट के दायरे को बढ़ाना है, ताकि ऐप्स के जरिए इकट्ठा की गई रिपोर्ट को टेलीकॉम उद्योग के प्रवर्तन ढांचे से प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके।
बता दें कि DLT प्लेटफॉर्म वाणिज्यिक संचार पर नजर रखता है और स्पैम-रोधी नियमों को लागू करता है।
विरोध
कॉलर-ID ऐप्स कर रहीं नियमों का विरोध
इस फैसले के बाद स्पैम-ब्लॉकिंग ऐप निर्माता ट्रूकॉलर ने इसे प्रतिस्पर्धा विरोधी बताया है। उसने टेकक्रंच को बताया कि वह इस जरूरत को 'एकतरफा लेन-देन' मानता है।
उसका तर्क है कि इससे उसके जैसे कॉल-मैनेजमेंट ऐप्स से व्यावसायिक कीमती डाटा टेलीकॉम ऑपरेटर्स के पास चला जाता है। भारत ट्रूकॉलर का सबसे बड़ा बाजार है।
दुनियाभर में इसके 50 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर्स में से 35 करोड़ से ज्यादा यहां से हैं।