बेपीकोलंबो मिशन: वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है बुध का अध्ययन, क्या है ग्रह की विशेषता?
क्या है खबर?
बुध सूर्य के सबसे करीब और सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है। इसी ग्रह के रहस्यों को समझने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का बेपीकोलंबो मिशन भेजा गया है। लॉन्च के करीब आठ साल की यात्रा के बाद यह मिशन बुध के पास पहुंचने वाला है। वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि सूर्य के बेहद करीब होने के बावजूद बुध कैसे बना। यही वजह है कि इसका अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए बेहद अहम है।
खासियत
सूर्य के सबसे करीब होना बड़ी खासियत
बुध सूर्य का एक चक्कर सिर्फ 88 पृथ्वी दिनों में पूरा करता है, जो सौरमंडल के किसी भी ग्रह से सबसे कम समय है।
सूर्य के बेहद करीब होने के कारण यहां तापमान में भी बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सूर्य की तरफ वाला हिस्सा करीब 430 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है, जबकि दूसरी तरफ तापमान लगभग माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
ऐसे में यह मिशन वैज्ञानिकों के लिए बेहद उपयोगी हैं।
चुंबकीय क्षेत्र
सतह और चुंबकीय क्षेत्र भी खास
बुध की सतह काफी हद तक चंद्रमा जैसी दिखाई देती है, जहां उल्कापिंडों और धूमकेतुओं के टकराने से बने कई क्रेटर मौजूद हैं।
इसकी खास बात सिर्फ सतह नहीं है। वैज्ञानिक इसके अंदर मौजूद कोर, सतह पर होने वाली गतिविधियों, चुंबकीय क्षेत्र और एक्सोस्फीयर का भी अध्ययन करना चाहते हैं।
ये जानकारियां यह समझने में मदद कर सकती हैं कि बुध की वर्तमान स्थिति कैसे बनी और सूर्य के लगातार प्रभाव ने अरबों वर्षों में ग्रह को किस तरह बदला।
रहस्य
बेपीकोलंबो से खुलेंगे कई रहस्य
बुध तक पहुंचना आसान नहीं है, क्योंकि सूर्य का मजबूत गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष यान के लिए बड़ी चुनौती बनता है।
इसी वजह से बेपीकोलंबो को अपनी गति और दिशा नियंत्रित करने के लिए पृथ्वी, शुक्र और बुध के कुल नौ फ्लाईबाई करने पड़े। मिशन में दो ऑर्बिटर शामिल हैं, जिन्हें यूरोप और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों ने बनाया है।
दोनों बुध के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन करेंगे। इससे वैज्ञानिकों को ग्रह के शुरुआती इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।