कीमोथेरेपी का विकल्प बन सकता है बैक्टीरिया आधारित इलाज, वैज्ञानिकों की नई खोज
क्या है खबर?
चीन के वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में दावा किया है कि उन्होंने एशेरिकिया कोलाई (ई कोलाई) बैक्टीरिया को कैंसर थेरेपी में बदलने का तरीका खोजा है। यह तरीका ट्यूमर के अंदर जाकर दवा तैयार करने और उसे वहीं सटीक तरीके से पहुंचाने में मदद कर सकता है। इससे पारंपरिक कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट काफी कम हो सकते हैं। यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इससे भविष्य में कैंसर के इलाज के और बेहतर रास्ते खुल सकते हैं।
बैक्टीरिया
ई कोलाई बैक्टीरिया का नया इस्तेमाल
ई कोलाई एक सामान्य बैक्टीरिया है, जो इंसानों की आंत में पाया जाता है और ज्यादातर मामलों में नुकसान नहीं करता है। वैज्ञानिकों ने इसके एक खास स्ट्रेन को चुना और उसे इस तरह तैयार किया कि वह ट्यूमर के अंदर जाकर बढ़ सके। रिसर्च में पाया गया कि यह बैक्टीरिया ट्यूमर के अंदर कॉलोनी बनाकर दवा छोड़ सकता है, जिससे इलाज सीधे उसी जगह पर असर करता है और शरीर के बाकी हिस्सों पर कम असर पड़ता है।
दवा
दवा बनाने और पहुंचाने में मददगार
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया को इस तरह इंजीनियर किया कि वह रोमिडेप्सिन नाम की कैंसर दवा खुद बना सके और सही जगह पहुंचा सके। यह दवा पहले से ही कुछ खास कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती है। चूहों पर किए गए टेस्ट में देखा गया कि बैक्टीरिया ने ट्यूमर में जाकर दवा छोड़ी और कैंसर सेल्स को रोकने में मदद की। कुछ मामलों में इसका असर सामान्य दवा से भी बेहतर और ज्यादा प्रभावी पाया गया।
रिसर्च
अभी शुरुआती चरण में है रिसर्च
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती स्टेज में है और इंसानों पर इसका परीक्षण अभी तक नहीं हुआ है। हालांकि, चूहों पर किए गए प्रयोग में इसके अच्छे और उत्साहजनक नतीजे मिले हैं और साइड इफेक्ट भी काफी कम देखे गए हैं। अगर भविष्य में यह तरीका सफल होता है, तो कैंसर के इलाज को ज्यादा सुरक्षित, सटीक और असरदार बनाया जा सकता है, जिससे मरीजों को बेहतर और कम दर्द वाला उपचार मिल सके।