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सैटेलाइट की बढ़ती संख्या से खतरे में खगोलीय शोध, इस अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा
सैटेलाइट की बढ़ती संख्या से खतरे में खगोलीय शोध

सैटेलाइट की बढ़ती संख्या से खतरे में खगोलीय शोध, इस अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

Jul 02, 2026
05:44 pm

क्या है खबर?

यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी के अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अगर आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नए सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए, तो इससे धरती से होने वाली खगोलीय शोध पर गंभीर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 17 लाख नए सैटेलाइट लॉन्च करने की योजनाएं सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे रात का आसमान पहले की तुलना में काफी ज्यादा चमकीला हो सकता है और कई टेलिस्कोप प्रभावित होंगे।

संख्या

कौन-कौन सी कंपनियां भेजना चाहती हैं सैटेलाइट?

वर्तमान में 14,000 से अधिक सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में मौजूद हैं। अध्ययन के अनुसार सबसे बड़ी योजना स्पेस-X की है, जिसने 10 लाख से ज्यादा नए स्टारलिंक सैटेलाइट भेजने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा ई-स्पेस, चीन की कुछ परियोजनाएं और रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल जैसी कंपनियां भी बड़ी संख्या में सैटेलाइट लॉन्च करना चाहती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी अधिक संख्या भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।

असर

टेलिस्कोप और रिसर्च पर पड़ सकता है असर

अध्ययन में बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा सैटेलाइट होने पर उनकी चमक और उनसे बनने वाली रोशनी की लकीरें बड़े स्पेस टेलिस्कोप की तस्वीरों को प्रभावित करेंगी। इससे दूर मौजूद गैलेक्सी, ग्रह और दूसरे खगोलीय पिंडों का अध्ययन मुश्किल हो सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि पृथ्वी के करीब आने वाले खतरनाक एस्ट्रोयड की पहचान करने वाले कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

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अन्य असर

रात का आसमान पहले से ज्यादा चमकीला हो सकता है

इस अध्ययन में खास चिंता उन प्रस्तावित सैटेलाइट को लेकर जताई गई है, जो सूरज की रोशनी को वापस पृथ्वी की ओर भेजने के लिए बनाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर ऐसे हजारों सैटेलाइट लॉन्च हुए, तो रात का आसमान तीन से चार गुना तक ज्यादा चमकीला हो सकता है। इससे बहुत हल्की और दूर की खगोलीय वस्तुओं को जमीन से देख पाना बेहद कठिन हो जाएगा।

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मांग

वैज्ञानिकों ने नियम बनाने की उठाई मांग

वैज्ञानिकों का कहना है कि सैटेलाइट की संख्या और उनकी चमक को लेकर दुनियाभर में स्पष्ट नियम बनने चाहिए। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी इस दिशा में कदम उठाने की मांग की है। उनका मानना है कि अगर समय रहते जरूरी फैसले नहीं लिए गए, तो भविष्य में धरती से होने वाली खगोलीय खोजों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और रात का प्राकृतिक आसमान हमेशा के लिए बदल सकता है।

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