आर्टेमिस II मिशन: क्यों 40 मिनट तक पृथ्वी से कट जाएगा अंतरिक्ष यात्रियों का संपर्क?
क्या है खबर?
नासा के आर्टेमिस II मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्री जल्द ही एक ऐसे पल से गुजरेंगे जब उनका पृथ्वी से संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। भारतीय समय के अनुसार मंगलवार सुबह 04:17 बजे से यह संपर्क टूटना शुरू होगा। लगभग 40 मिनट तक कोई सिग्नल नहीं मिलेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह अकेले होंगे। यह मिशन का अहम और संवेदनशील चरण माना जा रहा है, जिस पर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।
वजह
क्यों 40 मिनट तक संपर्क नहीं होगा?
जब अंतरिक्ष यान चांद के पीछे पहुंचता है, तो चांद खुद पृथ्वी और अंतरिक्ष यान के बीच आ जाता है। इसकी वजह से रेडियो और लेज़र सिग्नल रुक जाते हैं और कम्युनिकेशन पूरी तरह बंद हो जाता है। यही कारण है कि लगभग 40 मिनट तक अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी से संपर्क टूट जाता है। इसे ब्लैकआउट पीरियड कहा जाता है और यह हर चांद मिशन में एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण स्थिति होती है।
अनुभव
क्रू के लिए खास और शांत पल
इस दौरान अंतरिक्ष यात्री अपने काम पर ध्यान देंगे और चांद के पास के नज़ारों का अध्ययन करेंगे। वे तस्वीरें लेंगे और वैज्ञानिक जानकारी इकट्ठा करेंगे। इसके साथ ही, यह समय उनके लिए मानसिक रूप से भी खास होता है, क्योंकि वे पूरी तरह अकेले होते हैं। इससे पहले अपोलो मिशन के दौरान भी अंतरिक्ष यात्रियों ने ऐसे ही अनुभव साझा किए थे, जिसमें उन्होंने इसे शांत और अलग तरह का अनुभव बताया था।
समस्या
भविष्य में खत्म हो सकती है यह समस्या
वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह ब्लैकआउट खत्म किया जा सके। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) जैसे संगठन चांद के चारों ओर सैटेलाइट नेटवर्क बनाने की योजना बना रहे हैं, जिससे हर समय संपर्क बना रहे। जैसे ही स्पेसक्राफ्ट चांद के पीछे से बाहर आएगा, सिग्नल फिर जुड़ जाएगा और पूरी दुनिया राहत की सांस लेगी, साथ ही अंतरिक्ष यात्री अपनी जानकारी साझा कर सकेंगे।