धरती पर लौटने के बाद आर्टेमिस II दल के सामने नई चुनौती, देना होगा कड़ा टेस्ट
क्या है खबर?
नासा का आर्टेमिस II दल चंद्रमा की परिक्रमा करने बाद धरती पर सफलतापूर्वक लौट आया है। अब उनके सामने एक और कड़ी चुनौती आने वाली है। वे जॉनसन स्पेस सेंटर में एक बेहद कठिन अंतरिक्ष यात्री बाधा दौड़ में हिस्सा लेंगे। लैंडिंग के बाद इन यात्रियों को चिकित्सा और अनुसंधान संबंधी त्वरित जांच के लिए भेजा गया। यहां देखा जाएगा कि अंतरिक्ष में कई दिनों के बाद पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में उनका शरीर दोबारा कैसे प्रतिक्रिया करता है।
सिस्टम
इस सिस्टम के तहत होगी जांच
आर्टेमिस II दल में शामिल कमांडर रीड वाइजमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन को वापसी के बाद आराम करने के बजाय भारी स्पेससूट पहनाए जाएंगे। इसके साथ ही चंद्र सतह पर काम करने की स्थिति के अनुरूप बनाए गए नकली वातावरण में रखा जाएगा। ये प्रयोग ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में किए जाएंगे, जहां इंजीनियर एक्टिव रिस्पांस ग्रेविटी ऑफलोड सिस्टम (ARGOS) नामक रोबोटिक क्रेन सिस्टम का उपयोग करेंगे।
परेशानी
अंतरिक्ष से लौटने पर ये आती हैं परेशानी
ARGOS सिस्टम शरीर के वजन को आंशिक रूप से कम करके चंद्र गुरुत्वाकर्षण का अनुकरण कर सकती है। इससे शोधकर्ताओं को यह अध्ययन करने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष उड़ान के तुरंत बाद अंतरिक्ष यात्री कम गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में कैसा प्रदर्शन करते हैं। अंतरिक्ष में यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, हृदय संबंधी क्षमता कम हो जाती है और संतुलन के लिए जिम्मेदार आंतरिक कान प्रणाली को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुसार समायोजित होना पड़ता है।