एंथ्रोपिक ने पेश की फ्लैशप्रूफ तकनीक, पता चलेगा AI चैटबॉट किस मॉडल से दे रहा जवाब
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी एंथ्रोपिक ने फ्लैशप्रूव नाम की नई तकनीक पेश की है। इसकी मदद से यह जांचना संभव होगा कि AI चैटबॉट ने किसी सवाल का जवाब उसी मॉडल से दिया है या नहीं, जिसे इस्तेमाल करने का दावा किया गया था। दरअसल, तकनीकी जगत में आशंका जताई जा रही है कि कुछ कंपनियां लागत घटाने के लिए ग्राहकों को बताए बिना महंगे मॉडल की जगह सस्ते मॉडल से जवाब दिला सकती हैं।
डिजिटल प्रमाण
जवाब के साथ मिलेगा डिजिटल प्रमाण
फ्लैशप्रूव इस समस्या को दूर करने के लिए हर AI मॉडल की एक अलग डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करता है।
कंपनी मॉडल को सार्वजनिक करने से पहले उसका डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार करती है। इसके बाद जब कोई यूजर सवाल पूछता है, तो जवाब के साथ एक विशेष डिजिटल प्रमाण भी मिलता है।
जीरो नॉलेज प्रूफ नाम की तकनीक से इस प्रमाण की जांच की जा सकती है। इसमें कंपनी को अपने मॉडल का गोपनीय कोड साझा नहीं करना पड़ता।
तकनीक
कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने मिलकर बनाया
इस तकनीक को तैयार करने में एंथ्रोपिक के साथ MIT, EPFL, स्टार्कवेयर और सक्सिंक्ट के शोधकर्ताओं ने काम किया है।
इसकी क्षमता जांचने के लिए टीम ने मेटा के 400 अरब पैरामीटर वाले लामा 4 मैवरिक मॉडल पर परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान 1,024 टोकन वाले जवाब का डिजिटल प्रमाण तैयार किया गया।
इसके लिए H100 ग्राफिक्स चिप का इस्तेमाल हुआ और करीब 19 एमबी आकार की फाइल तैयार हुई।
उपलब्धता
आम इस्तेमाल के लिए अभी करना होगा इंतजार
फ्लैशप्रूव से तैयार प्रमाण को सामान्य कंप्यूटर पर करीब 17 सेकंड में जांचा जा सकता है।
एंथ्रोपिक ने इसका कोड और तकनीकी जानकारी अपाचे 2.0 लाइसेंस के तहत गिटहब पर मुफ्त उपलब्ध कराई है। हालांकि, यह अभी शुरुआती शोध परियोजना है और फिलहाल 1,024 टोकन तक सीमित है।
इसका प्रमाण तैयार करने में सामान्य AI कामकाज के मुकाबले 72 से 95 गुना ज्यादा कंप्यूटिंग समय लगता है। कंपनी ने इसे व्यावसायिक सेवा में शामिल करने की योजना नहीं बताई है।