जोहरियों के लिए गहनों के डिजाइन में सटीकता ला रहा AI, जानिए इसमें उपयोगी टूल
क्या है खबर?
आभूषणों के डिजाइन का सफर अब बहुत आगे निकल गया है, जहां पहले हाथ से स्केच बनाए जाते थे, वहीं अब सटीकता के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का इस्तेमाल हो रहा है। ये टूल सिर्फ सटीक 3D मॉडल ही नहीं बनाते, बल्कि मटेरियल का सही अंदाजा भी बताते हैं। ये ज्वेलरी से जुड़ी खास जानकारी का इस्तेमाल करके डिजाइन को अच्छा बनाते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे अलग-अलग AI टूल ज्वेलरी डिजाइन में क्रांति ला रहे हैं।
#1
ताशवी AI:
ताशवी AI को खासकर ज्वेलरी डिजाइन के लिए ही बनाया गया है। यह प्लेटिनम में टेपर्ड बैगेट साइड्स के साथ एमरल्ड-कट सेंटर जैसे मुश्किल कॉन्सेप्ट को भी आसानी से समझ लेता है। टूल एक गाइडेड मोड देता है, जिसमें यह स्टोन का प्रकार, उन्हें लगाने का स्टाइल और धातु (मेटल) के चुनाव के बारे में पूछता है। इसकी मटेरियल एस्टीमेशन सुविधा तस्वीरों को स्कैन करती है और धातु के वजन और स्टोन के कैरेट की पूरी जानकारी देती है।
#2
स्टाइल 3D AI
स्टाइल 3D AI ज्वेलरी डिजाइन के साथ-साथ इसे 3D विज़ुअलाइजेशन और मटेरियल सिमुलेशन की सुविधाओं से और भी बेहतर बनाता है। इस तरह यह टूल ज्वेलरी डिजाइन को कपड़ों के बड़े कलेक्शन के साथ बिल्कुल सही तरीके से मेल खाने में मदद करता है। यह टूल जल्दी से प्रोटोटाइप बनाने और वर्चुअल प्रेजेंटेशन देने की सुविधा भी देता है। इससे यह पक्का हो जाता है कि डिजाइन बिल्कुल वैसे ही उत्पादन के लिए तैयार हों जैसे वे दिखते हैं।
#3
राइनोआर्टिसन AI
राइनोआर्टिसन AI जौहरियों के लिए एक होशियार असिस्टेंट की तरह काम करता है। यह साधारण जानकारी को भी बिना किसी मुश्किल कमांड के डिटेल 3D मॉडल में बदल देता है। यह टूल उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद करता है और अलग-अलग मटेरियल विकल्पों को प्रभावी ढंग से आजमाने की सुविधा देता है। यह डिजाइनर्स को अलग-अलग मटेरियल के साथ प्रयोग करने की आजादी देता है। इससे कस्टम रिंग और कलेक्शन में और भी ज्यादा बारीकी आती है।
#4
डीजीन डॉट AI
डीजीन डॉट AI पहले स्केच से लेकर बिल्कुल असली दिखने वाली रेंडरिंग तक पूरे काम को बेहतर बनाता है। इसके मॉडल खास तौर पर ज्वेलरी डिजाइन के लिए ही तैयार किए गए हैं। यह हाथ से बनी ड्राइंग को बहुत कम समय में बेहद सटीक तस्वीरों में बदल देता है, जिससे हीरे और धातु को मिलाने में होने वाली गलतियां कम हो जाती हैं। डिजाइनर ग्राहकों की पसंद के हिसाब से डिजाइन में बदलाव कर सकते हैं।