AI टूल कैसे बदल रहे हैं टिकाऊ फैशन डिजाइन?
क्या है खबर?
फैशन उद्योग हर साल 9 करोड़ 20 लाख टन से भी ज्यादा कचरा पैदा करता है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से इसमें बड़े बदलाव आ रहे हैं। यह तकनीक डिजाइन का काम आसान बनाने, सैंपल की जरूरत कम कर पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे असर को घटाती है। वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग और डिमांड फॉरकास्टिंग से लेकर पर्यावरण के हिसाब से सही मटेरियल चुनने तक हर काम करते हैं। आइये जानते हैं AI इस काम को कैसे बेहतर बनाते हैं।
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डिजाइन में वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग का इस्तेमाल
CLO 3D और ब्रॉउजवियर जैसे AI प्लेटफॉर्म, फैशन डिजाइन में वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। ये टूल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी कपड़े की फिटिंग और मटेरियल की जांच सही समय में कर दिखाते हैं। डिजाइनर अब बिना हाथ से कोई सैंपल बनाए अलग-अलग स्टाइल, कटिंग और डिजाइन को आजमा सकते हैं। इससे असली उत्पादन शुरू होने से पहले सैंपल बनाने में होने वाली सामग्री की बर्बादी काफी कम हो जाती है।
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पर्यावरण के अनुकूल मटेरियल के लिए स्मार्ट सोर्सिंग
स्टाइल3D AI प्लेटफॉर्म ब्रांड्स को डिजिटल सैंपलिंग और स्मार्ट सोर्सिंग में बहुत मदद करता है। यह कपड़ों के कार्बन फुटप्रिंट, उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने की क्षमता जैसी चीजों का विश्लेषण करके बताता है। इससे डिजाइनर चाहे वे किसी छोटे ब्रांड से ही क्यों न हों आसानी से पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प चुन पाते हैं। यह प्लेटफॉर्म वर्चुअल ट्राई-ऑन (कपड़ों को डिजिटल तरीके से पहनकर देखना) की सुविधा भी देता है, जिससे गैर-जरूरी उत्पादन और भी कम हो जाता है।
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डिमांड फॉरकास्टिंग से बढ़ती है कामकाज की क्षमता
टॉमी हिलफिगर जैसे बड़े ब्रांड अब AI का इस्तेमाल डिमांड फॉरकास्टिंग के लिए कर रहे हैं। यह तरीका सप्लाई चेन को सबसे अच्छा बनाने और उत्पादन में लगने वाले समय को कम करने के लिए जरूरी है। टूल ग्राहकों की जरूरतों का बिल्कुल सही अंदाजा लगाते हैं। इससे जरूरत से ज्यादा माल नहीं बनता और उत्पादन बाजार की मांगों के हिसाब से ही होता है। इस तरीके से कामकाज की क्षमता बढ़ती ही है और बर्बादी भी कम होती है।
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सप्लाई चेन को बेहतर बनाता है जेनरेटिव AI
जेनरेटिव AI डाटा से ग्राहकों की मांग का अंदाजा लगाकर सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इससे गोदाम में सामान का हिसाब-किताब आसान हो जाता है, जिससे ब्रांड कम से कम बर्बादी करते हुए ज्यादा कुशलता से काम कर पाते हैं। यह नए और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले मटेरियल के लिए साझेदारी करने का रास्ता भी खोलता है। साथ ही, सटीक पैटर्न-कटिंग और फिट वैलिडेशन तकनीकों से कपड़े की बर्बादी भी कम होती है।