दवाइयों के रिसर्च में AI का कैसे हो रहा इस्तेमाल?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दवाइयों के रिसर्च के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रहा है। यह दवा खोजने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है, क्लीनिकल ट्रायल को बेहतर बना रहा है और डाटा के विश्लेषण के तरीके को भी सुधार रहा है। इस बदलाव की वजह से दवाओं को बनाने में लगने वाला समय और खर्च बहुत कम हो गया है। पहले इसमें सालों लग जाते थे। आइये जानते हैं AI कैसे दवाओं की रिसर्च को आसान बना रहा है।
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दवा खोजने की प्रक्रिया को तेज करना
AI टूल्स की मदद से संभावित दवाओं की पहचान अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी और कुशलता से हो पाती है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम बड़े-बड़े डेटासेट का विश्लेषण करते हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि अलग-अलग केमिकल कंपाउंड जैविक लक्ष्य के साथ कैसे जुड़ेंगे या प्रतिक्रिया देंगे। इस तरीके की वजह से नए दवा लक्ष्य को अब बहुत कम समय में पहचाना जा सकता है, जबकि पारंपरिक तरीकों से इसमें काफी ज्यादा वक्त लगता था।
#2
क्लीनिकल ट्रायल को बेहतर बनाना
क्लीनिकल ट्रायल में AI मरीजों की भर्ती और जगह के चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तकनीक की मदद से यह इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स (EHR) की जांच करता है। तकनीक से योग्य मरीजों को 3 गुना तेजी से और 93 फीसदी सटीकता के साथ पहचाना जाता है, जिससे मरीजों को ट्रायल में शामिल करने की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है। इसके अलावा, ट्रायल को रियल टाइम में प्रोटोकॉल में बदलाव करने का फायदा मिलता है।
#3
डाटा विश्लेषण को सुधारना
AI टूल डाला के विश्लेषण को और बेहतर बनाते हैं। ये मॉलिक्यूल डिजाइन करने और बायोमार्कर की पहचान करने के लिए बड़े-बड़े डेटासेट को एक साथ लाते हैं। ये काम को ऑटोमेटिक भी करते हैं और पारंपरिक तरीकों के मुकाबले दवा के प्रभाव का ज्यादा सटीक अनुमान लगाते हैं। जटिल जैविक डेटासेट का तेजी से विश्लेषण करके वैज्ञानिक उन पैटर्न को पहचान पाते हैं, जिनसे बीमारियों को मॉलिक्यूल स्तर पर समझने में नई सफलता मिलती है।
#4
दवा को नए उद्देश्य के लिए उपयोग करने में नए प्रयोग
दवा को किसी नए उद्देश्य के लिए उपयोग में लेने के प्रयासों में भी AI की भूमिका अहम है। इसमें मौजूदा दवाओं को नए इलाज के लिए परखा जाता है। कंपनियों के बीच हुए सहयोग से भी ऐसी खोजें हुई हैं। इन नए तरीकों से न केवल संसाधनों की बचत होती है, बल्कि पहले से मंजूर दवाओं का नए इलाज के लिए इस्तेमाल करके प्रभावी इलाज को बाजार में तेजी से लाया जा सकता है।