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AI ने सर्जरी को कैसे बना दिया आसान? समय की बचत और खतरा भी कम
AI ने सर्जरी का काम काफी आसान बना दिया है

AI ने सर्जरी को कैसे बना दिया आसान? समय की बचत और खतरा भी कम

Mar 17, 2026
12:38 pm

क्या है खबर?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब स्वास्थ्य सेवा में सर्जरी को और सटीक बना रही है। इसकी मदद से गलतियां कम होती हैं, ऑपरेशन में कम चीर-फाड़ होती है। एडवांस्ड रोबोटिक्स और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के साथ AI टूल मेडिकल इमेजिंग की जटिल जानकारी को झटपट समझते हैं। ये शरीर की छोटी-छोटी बनावटों में भी फर्क बता देते हैं और ऑपरेशन से पहले ही सही राह दिखाते हैं। आइये जानते हैं सर्जरी में AI कैसे मददगार साबित हो रहा है।

#1

एडवांस्ड रोबोटिक्स से बेहतर हुई सर्जरी 

AI से चलने वाले सर्जिकल रोबोट अपने आप हिल-डुल सकते हैं और शरीर के ऊतक को पहचान सकते हैं। पित्ताशय हटाने जैसे ऑपरेशन खुद करने के लिए इन्हें बहुत सारे वीडियो डाटा से ट्रेनिंग दी जाती है। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि इनकी मदद से ऑपरेशन ज्यादा सही होते हैं और परेशानी का खतरा भी कम हो जाता है। इनकी वजह से दूसरे देश में बैठकर भी ऑपरेशन करना मुमकिन हो गया है।

#2

मेडिकल इमेजिंग में रियल-टाइम एनालिटिक्स

अल्ट्रासाउंड, MRI और CT में AI से जुड़े टूल अब बहुत काम आ रहे हैं। ये इमरजेंसी वाले मामलों को पहले देखते हैं और बीमारी के लक्षणों को पुराने तरीकों से कहीं जल्दी पकड़ लेते हैं। रोबोटिक्स और AI को एक साथ लाने वाले प्लेटफॉर्म से ऐसे ऑपरेशन आसान हो जाते हैं, जिनमें कम चीर-फाड़ करनी पड़ती है। प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स टूल पहले ही बता देते हैं कि किसी ऑपरेशन में कितना समय लगेगा और क्या खतरे हो सकते हैं।

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#3

प्रेडिक्टिव गाइडेंस से हुआ फायदा 

AI के टूल अब ऑपरेशन में पहले से ही सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं। इससे सर्जरी का तरीका ऐसा हो गया है कि अब बीमारी होने पर इलाज करने की बजाय, पहले ही तैयारी कर ली जाती है। ये टूल मेडिकल इमेजिंग की जटिल जानकारी को बहुत जल्दी समझते हैं और शरीर की छोटी-छोटी बनावटों में भी फर्क बता देते हैं। MISSO रोबोटिक सिस्टम ऑपरेशन के दौरान मरीज के डाटा का तुरंत विश्लेषण करता है।

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टिप 4

ऑपरेशन में कम चीर-फाड़ की संभावना 

ट्रेनिंग के लिए AI से चलने वाले सिमुलेशन और मेटावर्स में 3D गाइडेंस जैसी नई चीजें सर्जरी के नतीजों को और भी बेहतर बनाने का वादा कर रही हैं। इस तरक्की के कारण कम चीर-फाड़ वाले ऑपरेशन बहुत बढ़ गए हैं। उम्मीद है कि 2026 तक लगभग 90 फीसदी अस्पताल AI डायग्नोस्टिक्स यानी AI से जांच करने का तरीका अपना लेंगे। डॉक्टर अभी भी ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रखते हैं, लेकिन यह तकनीक इलाज को आसान बनाती है।

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