आंखों संबंधी बीमारियों का पता लगाने में कैसे कारगर साबित हो रहा AI?
क्या है खबर?
बीमारियों का खुद पता लगाने से लेकर जांच की सटीकता बढ़ाने और चिकित्सकों का काम हल्का करने तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नेत्र विज्ञान की दुनिया को तेजी से बदल रहा है। AI की शुरुआत तो क्लीनिकल कामों में एक प्रयोग के तौर पर हुई थी, लेकिन अब यह रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले व्यावहारिक ऐप तक पहुंच गया है। आइये जानते हैं AI कैसे नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रहा है।
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बीमारियों की अपने आप जांच करने वाले टूल
नेत्र विज्ञान में AI का सबसे बड़ा और एडवांस इस्तेमाल डायबिटिक रेटिनोपैथी की खुद-ब-खुद जांच करने में हो रहा है। 2018 में IDx-DR सिस्टम किसी भी मेडिकल क्षेत्र में FDA से मंजूरी पाने वाला पहला AI डायग्नोस्टिक टूल बना था। इसकी सेंसिटिविटी 87 फीसदी और स्पेसिफिसिटी 90 फीसदी तक पाई गई। आईनुक के आईआर्ट जैसे सिस्टम्स का 5 लाख से ज्यादा मरीजों पर ट्रायल किया गया। AEYE-DS टूल सामुदायिक क्लीनिकों में भी डायबिटिक रेटिनोपैथी की जांच में मदद करता है।
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उन्नत इमेजिंग विश्लेषण
AI-आधारित ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी और फंडस इमेजिंग जैसी तकनीकें अब बीमारियों की पहचान के तरीके को बदल रही हैं। टूल AI एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके तस्वीरों का विश्लेषण करते हैं, रोग संबंधी बदलावों को दिखाते हैं, परिवर्तनों को मापते हैं और पुरानी जांचों से उनकी तुलना करते हैं। RET फाउंड बेहतरीन मॉडल है, जिसे 16 लाख रेटिनल इमेज पर सेल्फ-सुपरवाइज्ड लर्निंग के साथ प्रशिक्षित किया गया है। इसका इस्तेमाल डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने जैसे कामों में किया जाता है।
#3
उपचार निर्णय असिस्टेंट सिस्टम
भविष्य का अनुमान लगाने वाले AI एल्गोरिदम रेटिनल स्कैन का विश्लेषण करके बीमारियों का पता लगाते हैं, समस्याओं को वर्गीकृत करते हैं, बीमारी के बढ़ने का अनुमान लगाते हैं और मरीज के हिसाब से इलाज की योजना बनाने में सहायता करते हैं। आज-कल इंट्राओकुलर लेंस फॉर्मूला में भी AI की मदद ली जा रही है, जिससे सर्जरी के नतीजे काफी बेहतर हो रहे हैं। सर्जिकल प्लानिंग में इसके उपयोग से 90 फीसदी से अधिक सटीकता मिली है।
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चिकित्सकों के काम का बोझ कम करना
गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखते हुए भी, AI टूल नेत्र रोग विशेषज्ञों के काम का बोझ कम कर रहे हैं। 30,000 से अधिक रेटिनल इमेज पर प्रशिक्षित किए गए एल्गोरिदम ने दिखाया है कि ये टूल काम का बोझ 50 फीसदी से ज्यादा घटा सकते हैं। आईआर्ट सिस्टम्स ने प्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी का पता लगाने में 99.6 फीसदी की शानदार सेंसिटिविटी रेट हासिल की है, जबकि रिटमार्कर जैसे दूसरे सिस्टम्स ने 97.9 फीसदी की सेंसिटिविटी रेट दिखाई है।