महिलाओं को जल्द मिलेगा आरक्षण, केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करेगी विधेयक
क्या है खबर?
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल को जल्द से जल्द लागू करने के लिए बड़ी तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार कानून को 2011 की जनगणना पर आधार पर लागू कर सकती है, जिसके लिए विचार-विमर्श चल रहा है। केंद्र सरकार मौजूदा बजट सत्र में कानून में संशोधन करने और संसद के निचले सदन (लोकसभा) में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए एक विधेयक पेश कर सकती है।
कानून
अगले सप्ताह पेश किया जा सकता है विधेयक
वर्ष 2023 में महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) संसद से पारित हुआ था, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, परिसीमन प्रक्रिया लंबित होने के कारण इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका। अगर सरकार परिसीमन से पहले आरक्षण लागू करने की कार्यवाही करती है, तो एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी। ऐसे में मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विधेयक को संभवतः अगले सप्ताह राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
संसद
विपक्ष से भी बात कर रही सरकार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संवैधानिक परिवर्तन के लिए अनुच्छेद 368(2) के तहत दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई मतों द्वारा अनुमोदन अनिवार्य है। इसके लिए सरकार विपक्ष से बात करके संवैधानिक संशोधन को सुचारू रूप से पारित कराने के लिए व्यापक समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। लोकसभा में 240 और राज्यसभा में 103 सांसदों वाली भाजपा के पास विपक्षी दलों के समर्थन के बिना संशोधन पारित करने के लिए दोनों सदनों में पर्याप्त संख्या नहीं है।
सीटें
लोकसभा में 273 सीटें महिलाओं के लिए होंगी आरक्षित
केंद्र सरकार की योजना 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण को लागू करना है। इससे लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगा, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।