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भारतीय वायुसेना से बंगाल की राजनीति तक: कौन थे सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ? 
कौन थे सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ?

भारतीय वायुसेना से बंगाल की राजनीति तक: कौन थे सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ? 

लेखन Manoj Panchal
May 07, 2026
10:12 am

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी चुनावी जीत के जश्न के बीच बुधवार रात पार्टी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनकी कार को रोककर करीब से फायरिंग की, जिसमें उनकी मौत हो गई। चंद्रनाथ को सुवेंदु का खास आदमी माना जाता था। राजनीति में आने से पहले 41 वर्षीय चंद्रनाथ करीब 18 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा दे चुके थे। आइए उनके बारे में जानते हैं।

वायुसेना

भारतीय वायुसेना में 18 साल तक दी सेवाएं

चंद्रनाथ पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर के रहने वाले थे। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने रामकृष्ण मिशन से जुड़े संस्थानों में की थी। वे शांत स्वभाव और अनुशासित जीवन के लिए जाने जाते थे। युवावस्था में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में वे भारतीय वायुसेना में शामिल हुए। उन्होंने करीब 18 साल वायुसेना में सेवा दी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया और फिर राजनीति की तरफ बढ़े।

राजनीति 

TMC के दौर में बने सुवेंदु के करीबी

चंद्रनाथ और सुवेंदु की पहचान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दौर से थी। दोनों पूर्वी मेदिनीपुर से आते थे और पुराने राजनीतिक संबंध साझा करते थे। चंद्रनाथ का परिवार भी पहले TMC से जुड़ा हुआ था। उनकी मां हासी रथ पंचायत स्तर की राजनीति में सक्रिय रही थीं। 2019 में जब सुवेंदु ममता बनर्जी सरकार में मंत्री थे, तब चंद्रनाथ उनकी टीम का हिस्सा बने। इसके बाद 2020 में सुवेंदु के भाजपा में आने पर चंद्रनाथ ने भी पार्टी बदल ली।

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रणनीति

संभालते थे ये जिम्मेदारियां

भाजपा में आने के बाद चंद्रनाथ तेजी से सुवेंदु के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए। शुरुआत में वे कार्यालय और प्रशासनिक काम देखते थे, लेकिन बाद में चुनावी रणनीति, संगठनात्मक समन्वय और कार्यकर्ताओं से संपर्क जैसी जिम्मेदारियां संभालने लगे। भाजपा के भीतर उन्हें 'शैडो मैन' कहा जाता था। भवानीपुर उपचुनाव समेत कई अहम राजनीतिक अभियानों में उनकी भूमिका बताई जाती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चंद्रनाथ संवेदनशील राजनीतिक मामलों और बैकरूम ऑपरेशन को संभालने में माहिर थे।

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विवाद 

मतगणना से पहले भवानीपुर में किया था विरोध प्रदर्शन

मतगणना से पहले 30 अप्रैल को ममता बनर्जी भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम पहुंची थीं। उसी दौरान चंद्रनाथ भाजपा समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और कथित तौर पर मतगणना केंद्र के पास खड़ी TMC की प्रचार गाड़ी पर आपत्ति जताई थी। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों के साथ बहस भी हुई। पुलिस और CRPF के हस्तक्षेप के बाद वाहन को वहां से हटाया गया। उस समय सुवेंदु कोलकाता में मौजूद नहीं थे और चंद्रनाथ ने ही विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।

राजनीतिक तनाव

हत्या के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

बुधवार रात उत्तर 24 परगना के माध्यामग्राम के दोहरिया इलाके में बाइक सवार हमलावरों ने चंद्रनाथ की गाड़ी को रोका और उनको गोली मार दी। उनकी हत्या के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। भाजपा ने इसे चुनाव बाद हिंसा से जोड़ते हुए TMC पर निशाना साधा है। घटना के बाद सुवेंदु, सुकांत मजूमदार और अन्य भाजपा नेता अस्पताल पहुंचे और चंद्रनाथ को श्रद्धांजलि दी। पोस्टमार्टम के लिए उनके शव को AIIMS कल्याणी भेजा गया है।

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