Gen-Z पीढ़ी और आरक्षण-समलैंगिकता को लेकर क्या सोचती है RSS? मोहन भागवत ने दिया जवाब
क्या है खबर?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन ने केंद्र सरकार को झुका दिया और 12 साल में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत इसको सही मानकर कहते हैं कि संवाद में कमी के कारण आंदोलन हुआ, उनकी बात सुननी चाहिए थी। भागवत ने यह बात मुंबई में युवाओं के एक कार्यक्रम में कही। RSS और भागवत Gen-Z और Gen-अल्फा पीढ़ी के बारे में क्या सोचते हैं? आइए, जानते हैं।
बयान
प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र-विरोधी नहीं कहना चाहिए- भागवत
मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के 15वें स्थापना दिवस पर भागवत ने 15-19 वर्ष के 2,000 छात्रों से बेरोजगारी, आरक्षण, महिला-समलैंगिक समुदाय के समान अधिकारों और विदेश नीति पर बात की।
इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन में प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राष्ट्र-विरोधी कहे जाने पर विरोध जताया।
उन्होंने कहा कि Gen-Z प्रदर्शन में जो शिकायतें थीं, वो जायज हैं, Gen-Z राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं और लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक जरिया है।
बयान
शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत- भागवत
भागवत ने नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में कहा, "Gen-Z हमारे अपने बच्चे हैं। अगर वे किसी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन करते हैं, तो वे राष्ट्र-विरोधी कैसे हो सकते हैं? उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। लोकतंत्र में, विरोध-प्रदर्शन भी संवाद का एक रूप है। विरोध करने में कुछ भी गलत नहीं, लेकिन इसका इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"
उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत है और चर्चा आवश्यक हैं।
बयान
भागवत बोले- हमसे ज्यादा ईमानदार हैं Gen-Z और Gen-अल्फा
भागवतन ने आगे कहा कि जब हम Gen-Z की उम्र में थे, तब जो बड़े कहते थे, उनकी बात मान लेना हमारी आदत थी औ कोई सवाल नहीं करते थे, लेकिन आज की Gen-Z और Gen-अल्फा पीढ़ी सवाल भी करती है और तर्कसंगत जवाब भी चाहती है।
उन्होंने आगे कहा, "मैं Gen-Z और Gen-अल्फा पीढ़ी पर आंख बंद करके भरोसा करता हूं क्योंकि वे हमसे एक ईमानदार पीढ़ी हैं। अगर Gen-Z चिल्ला रहे हैं तो उनकी तकलीफ सुननी चाहिए।"
आरक्षण
आरक्षण पर क्या बोले भागवत?
आरक्षण के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि जब तक समाज में असमानता रहेगी, आरक्षण रहेगा।
उन्होंने कहा, "कुछ समुदायों को आरक्षण से लाभ हुआ है और उन्होंने प्रगति की है, जबकि अन्य अभी भी वंचित हैं। जिन लोगों को आरक्षण से लाभ मिल चुका है, वे इसे छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।"
भगवत ने कहा कि शिक्षा व्यवसाय नहीं बनना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के लिए देश के कुल बजट का 6 प्रतिशत खर्च करने का समर्थन किया।
समलैंगिकता
समलैंगिकता पर क्या बोले भागवत?
समलैंगिकता को लेकर भागवत ने कहा कि इनको समाज के हिस्से के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "विवाह अगली पीढ़ी को समाज के जिम्मेदार सदस्य बनने के लिए तैयार करती है, और इस प्रणाली में बदलाव सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।"
उन्होंने समलैंगिक विवाहों की वैधता पर कहा, "समाज में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे समलैंगिक साथी एक साथ रह सके। इसके लिए कानून बनाया जा सकता है, जिसे समाज स्वीकार भी करे, लेकिन शादी से छेड़छाड़ न हो।"