#NewsBytesExplainer: धन्यवाद प्रस्ताव क्या होता है और क्या प्रधानमंत्री का इस पर जवाब देना जरूरी है?
क्या है खबर?
संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में खूब हंगामा हो रहा है। लोकसभा में जबरदस्त हंगामे के बीच आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। कल यानी 4 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर जवाब देने वाले थे, लेकिन हंगामे के बीच उनका संबोधन नहीं हो सका। इसके बाद सालों पुरानी परंपरा टूट गई है। आइए आज धन्यवाद प्रस्ताव के बारे में जानते हैं।
प्रस्ताव
क्या होता है धन्यवाद प्रस्ताव?
धन्यवाद प्रस्ताव एक संसदीय प्रक्रिया है, जिसमें संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर आभार प्रकट करने के लिए औपचारिक प्रस्ताव पेश किया जाता है। धन्यवाद प्रस्ताव पर कई मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। सदस्य राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय महत्व के किसी भी मामले पर बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा प्रधानमंत्री या किसी अन्य वरिष्ठ मंत्री के जवाब के साथ खत्म होती है।
संविधान
संविधान में धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर क्या कहा गया है?
संविधान के अनुच्छेद 87 में प्रावधान है कि हर आम चुनाव के बाद और हर साल के पहले सत्र में राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करेगा। राष्ट्रपति का संबोधन आमतौर पर सरकारी नीतियों पर केंद्रित होता है, जिसे मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया जाना जरूरी है। इसमें राष्ट्रपति सरकार की विधायी और नीतिगत उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हैं और आने वाले साल के एजेंडे को रखते हैं।
चर्चा
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का तरीका जानिए
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा सदन की सिफारिशों के आधार पर 3-4 दिन चलती है। इसकी शुरुआत प्रस्तावक द्वारा की जाती है, जिसके बाद समर्थक संबोधित करते हैं। दोनों का चयन प्रधानमंत्री करते हैं। हर पार्टी को सदन में उसके सदस्यों की संख्या के आधार पर चर्चा का समय मिलता है। चर्चा के दौरान सदस्य उन मामलों का जिक्र नहीं कर सकते, जो केंद्र सरकार के सीधे संबंधित नहीं है। सांसद बहस में राष्ट्रपति का नाम भी नहीं ले सकते हैं।
अहमियत
कितना अहम होता है धन्यवाद प्रस्ताव?
धन्यवाद प्रस्ताव का सदन से पारित होना जरूरी है। अगर ये प्रस्ताव गिर जाता है, तो इसे सरकार की हार माना जाता है, क्योंकि यह सत्तारूढ़ पार्टी में विश्वास की कमी को दर्शाता है। यह उन तरीकों में से एक है, जिसके जरिए लोकसभा में सरकार अविश्वास में आ सकती है। अगर धन्यवाद प्रस्ताव पारित नहीं होता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ सकता है या विश्वास मत के जरिए बहुमत साबित करना पड़ सकता है।
जवाब
धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब देना जरूरी होता है?
संवैधानिक तौर पर प्रधानमंत्री का संबोधन जरूरी नहीं है। ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि प्रस्ताव पर बहस के बाद प्रधानमंत्री को ही जवाब देना होगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण, धन्यवाद प्रस्ताव और उस पर मतदान के साथ ही कार्यवाही पूरी मानी जाती है। हालांकि, प्रधानमंत्री का संबोधन परंपरा और राजनीति से जुड़ा है। संसदीय परंपरा में आमतौर पर प्रधानमंत्री ही धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का आखिरी जवाब देते रहे हैं। इसे सरकार का आधिकारिक और निर्णायक पक्ष माना जाता है।
पिछला घटनाक्रम
क्या पहले भी कभी हुआ है ऐसा घटनाक्रम?
10 जून, 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन को संबोधित नहीं कर पाए थे। तब भी विपक्ष के हंगामे के चलते ऐसा हुआ था। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, "जून, 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर नहीं दिया था, क्योंकि उन्हें उत्तर देने से रोका गया था।" बाद में 2005 में डॉक्टर सिंह ने 2 बार संबोधित किया था।