पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कैबिनेट भंग की, ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य कैबिनेट को भंग कर दिया है। इससे आधिकारिक तौर पर ममता मुख्यमंत्री नहीं हैं। उन्होंने यह निर्णय तब लिया, जब 4 मई को चुनाव में हार के बाद भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था। राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद-174 के क्लॉज (2) के सब-क्लॉज (b) के तहत विधानसभा भंग किया है।
आदेश
मुख्य सचिवा ने जारी किया आदेश
राज्य सरकार के संसदीय मामलों के विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, मौजूदा विधानसभा 7 मई, 2026 से आधिकारिक रूप से भंग हो जाएगी। राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर इस आदेश को राज्य के मुख्य सचिव दुष्मंता नरियाला ने प्रकाशित किया है। किसी राज्य में चुनाव के बाद नई सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय संभालने से पहले पुरानी विधानसभा को भंग किया जाता है। यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री के स्वत: इस्तीफे से शुरू होती है, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं हुआ।
कार्यभार
नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण तक राज्यपाल संभालेंगे कार्यभार
किसी राज्य में मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्यपाल उन्हें नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक कार्यभार सौंपते हैं, लेकिन बंगाल में स्थिति अलग है। बताया जा रहा है कि अब नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण होने तक खुद राज्यपाल आरएन रवि अंतरिम प्रभार संभालेंगे। बंगाल में भाजपा के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में होगा। इसके बाद वे कार्यभार उनको सौंपेंगे।
आरोप
कोर्ट जा सकती हैं ममता
ममता के इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद राज्य में संवैधानिक और राजनीतिक गतिरोध पैदा हुआ है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "हम चुनाव हारे नहीं, हराए गए हैं। 100 सीटों पर वोटों की लूट हुई है। चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण था। क्या आपको लगता है कि मैं इस्तीफा दे दूं? मैं नहीं जाऊंगी। मैं सड़कों पर ही रहूंगी।" संभावना है कि ममता चुनाव और नई सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं।
परिणाम
बंगाल में क्या रहा चुनाव परिणाम?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर TMC के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया। TMC की सीटें घटकर मात्र 80 रह गई हैं। कांग्रेस ने 2 सीटें और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 2 सीटें जीती हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में हिंसा और उपद्रव शुरू हो गया है, जिसमें भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के सहायक समेत 4 मौत हुई है।