उत्तर प्रदेश MLC चुनाव 2026: भाजपा ने जीती 4 सीटें, समाजवादी पार्टी को भी बढ़त
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों की मतगणना जारी है। भाजपा ने 4 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) ने 1 सीट जीती है। शेष 6 सीटों पर चल रही मतगणना के रुझानों में SP अभी 4 सीटों पर आगे है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हो रहे इस चुनाव को सभी राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा आत्म परीक्षण माना जा रहा है।
जीत
भाजपा ने इस सीटों पर दर्ज की जीत
अब सामने आए चुनाव परिणामों के अनुसार, मेरठ स्नातक शीट से भाजपा के दिनेश कुमार गोयल, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से हरि सिंह ढिल्लों और लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी ने जीत दर्ज कर ली है।
इसी तरह SP के लाल बिहारी यादव ने वाराणसी डिवीजन शिक्षक सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।
ये जीत उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ही दलों के लिए काफी अहम है।
अन्य
शेष 6 सीटों पर क्या है स्थिति?
गोरखपुर शिक्षक और आगरा स्नातक सीट से भाजपा के उम्मीदवार बढ़त बनाए हैं।
इसी तरह वाराणसी स्नातक, आगरा शिक्षक, लखनऊ स्नातक और झांसी स्नातक सीट पर SP के उम्मीदवारों ने बढ़त बना रखी है।
अगर यह रुझान जारी रहता है, तो यह SP के लिए एक बड़ी बढ़त होगी, जिसने 2020 में 11 में से केवल 3 सीटें जीती थीं।
2020 में भाजपा ने इन 11 सीटों में से 6 जीती थीं और 2 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती थीं।
विवाद
मतगणना के दौरान विवाद और विपक्षी बहिष्कार
मतगणना प्रक्रिया के दौरान कुछ जगहों पर भारी हंगामा और राजनीतिक तकरार देखने को मिली है।
आगरा में मतगणना के दौरान भाजपा और SP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से SP उम्मीदवार संजयायन त्रिपाठी ने मतगणना का बहिष्कार कर दिया और धांधली के गंभीर आरोप लगाए।
उनका कहना था कि तीसरे दौर तक निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव 450 वोटों से आगे थे, लेकिन अचानक पीछे हो गए।
साख
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के लिए साख की लड़ाई
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में भाजपा को तगड़ा झटका लगा था, जहां कांग्रेस-SP गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीतकर भाजपा को 33 सीटों पर समेट दिया था।
ऐसे में भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस स्थानीय चुनाव को जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, जबकि SP लोकसभा चुनाव की लय को बरकरार रखने की कोशिश में है।
ऐसे में इन चुनावों के परिणाम दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।