कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार को राहत, जमानत के खिलाफ याचिका पर विचार नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रधान को अंतरिम जमानत देने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि वह याचिका पर विचार की इच्छुक नहीं।
सुनवाई
कोर्ट में क्या हुआ?
राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा, "उस पर धारा 302 (हत्या) का मामला दर्ज है। उसे चुनाव के लिए जमानत मिल गई है। क्या मैं कल जोखिम उठा सकता हूं?"
मेहता ने गुरुवार को सुनवाई की मांग की।
इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा, "अदालत के समक्ष पहले से ही काफी लंबी कार्यवाही चल रही है। हम निश्चित रूप से इसे खारिज कर देंगे, लेकिन हम इसे सोमवार को खारिज करेंगे, कल नहीं।"
जमानत
हाई कोर्ट ने 29 सितंबर को दी थी जमानत
हाई कोर्ट ने 29 सितंबर को प्रधान को 6 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दी थी, जिससे प्रधान को 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में भाग लेने की अनुमति मिल गई।
हाई कोर्ट ने गौर किया कि प्रधान ने अपनी गिरफ्तारी से पहले नामांकन दाखिल किया था और मामले लगभग 19 साल पुराने थे।
कोर्ट ने पाया कि पुलिस के पास कार्रवाई करने के अवसर थे, लेकिन प्रधान को नामांकन दाखिल करने के बाद ही गिरफ्तार किया गया।
रणनीति
नंदीग्राम में कांटे की टक्कर
नंदीग्राम उपचुनाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा सीट खाली करने के बाद हो रहा है। यहां से तृणमूल कांग्रेस ने संचिता प्रधान को उम्मीदवार बनाया था, जिन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद 18 सितंबर को नाम वापस ले लिया।
इसके बाद ममता बनर्जी ने प्रधान को समर्थन दिया, जिसके तुरंत बाद प्रधान को 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था।
प्रधान के खिलाफ दर्ज मामले 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े हैं।