संसद मानसून सत्र: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित
क्या है खबर?
संसद के मानसून सत्र के 5वें दिन भी लोकसभा में विपक्ष की ओर से भारी हंगामा देखने को मिला। ऐसे में लोकसभा में पीठासीन जगदंबिका पाल ने कार्यवाही को 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्षी सांसदों ने NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
विरोध
विपक्ष ने कार्यवाही शुरू होते ही किया हंगामा
विपक्षी सांसदों ने सदन की कार्यवाही शुरू होती ही NEET में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर विरोध शुरू कर दिया।
इसके बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर पीठासीन पाल ने शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा।
प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी दल बैनर-पोस्टर लेकर वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। ऐसे में कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
अपील
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से की चर्चा की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "जो प्रधानमंत्री ने कहा है, उस पर हम लोग फैसला लेने जा रहे हैं। अगर हम संसद में चर्चा नहीं करेंगे, तो बिल्कुल अच्छा संदेश नहीं जाएगा। मैं राहुल गांधी से अनुरोध करता हूं कि वे अपनी पार्टी के साथियों को समझा दें। सभी ने चर्चा करने की मांग की है। मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि हम इस पर अच्छी और सार्थक बहस क्यों नहीं कर सकते।"
विरोध
कुछ विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े पहनकर भी जताया विरोध
विपक्षी सांसदों ने हाथों में तख्तियां और बड़े बैनर ले रखे थे, जिन पर 'इस्तीफा दो', 'गद्दी छोड़ो', और 'शर्म करो' जैसे नारे लिखे हुए थे।
विरोध को और कड़ा रूप देने के लिए कई विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे थे।
सदन के अंदर हंगामे के अलावा संसद परिसर के मकर द्वार पर भी राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव की मौजूदगी में विपक्ष ने शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया।
चेतावनी
शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने तक आगे नहीं बढ़ेगी कार्यवाही
विपक्ष का कहना है कि यह देश के 24 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में सरकार को शिक्षा मंत्री प्रधान से तुरंत इस्तीफा लेना चाहिए, छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद इस मुद्दे पर देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।
विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, वे चर्चा को आगे नहीं बढ़ने देंगे।