महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा, शिवसेना के कई विधायक और सांसद बदल सकते हैं पाला
क्या है खबर?
महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा ने जोड़ पकड़ ली है। संभावना जताई जा रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बड़ी टूट हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के 16 विधायक और 6 लोकसभा सांसद मानसून सत्र से पहले पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इसका कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन शिंदे गुट के विधायक लगातार इसकी चर्चा कर रहे हैं।
अफवाह
मातोश्री में बैठक बुलाने से अफवाह ने पकड़ी रफ्तार
इन अटकलों को तब हवा लगी, जब उद्धव ने मुंबई स्थित अपने आवास मातोश्री में शिवसेना के सभी 9 लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। इस दौरान कई लोग उपस्थित हुए और कुछ लोगों ने वर्चुअल बैठक में भाग लिया। पार्टी नेताओं ने बताया कि सभी 9 सांसद बैठक में शामिल हुए थे। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी की ताकत का आकलन करना और विभाजन की अफवाहों का खंडन करना था। हालांकि, यह बैठक चर्चा का विषय है।
उपस्थिति
इन सांसदों ने बनाई बैठक से दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई दक्षिण के सांसद अरविंद सावंत, मुंबई दक्षिण-मध्य सांसद अनिल देसाई, नासिक सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई उत्तर-पूर्व सांसद संजय दीना पाटिल बैठक में आए थे। यवतमाल-वाशिम के संजय देशमुख और हिंगोली के नागेश पाटिल आष्टीकर ऑनलाइन जुड़े थे। परभणी सांसद संजय जाधव, शिर्डी सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे और धाराशिव सांसद ओमराजे निंबालकर बैठक में नहीं थे। निंबालकर की अनुपस्थिति के पीछे पारिवारिक कारण बताए गए हैं, जबकि अन्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
चर्चा
क्यों शुरू हुई शिवसेना को तोड़ने की चर्चा?
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाइक ने दावा किया कि ऑपरेशन टाइगर 24 घंटे और 365 दिन चलता रहता है, यह कोई एक बार का राजनीतिक प्रयास नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल सांसदों, विधायकों या पूर्व पार्षदों तक ही सीमित नहीं है, इसमें आम श्रमिकों का भी स्वागत है। अटकलों को शिवसेना विधायक कृपाल तुमाने ने भी हवा दी कि उद्धव गुट के अधिकांश शिवसेना सांसद शिंदे गुट संपर्क में हैं और जल्द शामिल होंगे।
कानून
कम से कम 6 सांसदों के पार्टी बदलने से अयोग्यता से बचेंगे
लोकसभा में शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 9 सांसद हैं। अगर इनमें कुछ सांसद दलबदल करके दूसरी पार्टी में जाते हैं, तो उनके पास कम से कम 2 तिहाई सदस्य यानी 6 सांसदों का साथ होना जरूरी है। इससे कम सांसद होने पर वे अयोग्य साबित होस कते हैं, जिससे उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का कहना है कि कोई भी सांसद पार्टी नहीं छोड़ रहा है। सभी उद्धव गुट के प्रति समर्पित हैं।