उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, 6 बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मिली मंजूरी
क्या है खबर?
संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। दलबदल विरोधी कानून के तहत उनके दल-बदल को औपचारिक रूप से वैध ठहराया गया है। इस फैसले के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत बढ़कर अब 13 सांसदों की हो गई है।
फैसला
संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत दी मंजूरी
उद्धव गुट के ये 6 सांसद करीब एक महीने पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हुए थे।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला का यह फैसला संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के प्रावधानों के अनुरूप है।
इसके तहत यदि किसी विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।
ऐसे में अध्यक्ष का यह फैसला उद्धव गुट के लिए बड़ा झटका है।
मजबूती
मानसून सत्र से पहले शिंदे गुट की शिवसेना हुई मजबूत
यह फैसला 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया है, जिससे सदन में शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत हो गई।
हालांकि, उद्धव गुट ने इसे चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि यह विभाजन पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के दो-तिहाई बहुमत की कानूनी आवश्यकता को पूरा नहीं करता है।
साल 2022 में शिवसेना में हुई टूट के बाद से दोनों गुटों के बीच असली पार्टी और सिंबल को लेकर लड़ाई जारी है।
पृष्ठभूमि
बागियों ने 22 जून को शिंदे गुट में शामिल होने का किया था ऐलान
शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 ने 22 जून को शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का ऐलान किया था।
इन बागी सांसदों में संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), नागेश पाटिल-अष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) शामिल हैं।
इन सभी ने लोकसभा अध्यक्ष से शिंदे गुट में शामिल होने को मान्यता देने की मांग की थी।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने इसे कानूनी रूप से सही बताया था।