कर्नाटक कांग्रेस में बड़ी बगावत, मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर 2 विधायकों ने दिया इस्तीफा
क्या है खबर?
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार से ठीक पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से नाराज होकर पार्टी के 2 वरिष्ठ विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। इनमें विजयपुरा जिले की इंडी सीट से विधायक यशवंतरायगौड़ा वी पाटिल और शिवमोग्गा जिले की सागर सीट से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण शामिल हैं। दोनों ने कांग्रेस पर विश्वासघात करने का आरोप भी लगाया है।
इस्तीफा
दोनों विधायकों ने डिप्टी स्पीकर को सौंपे इस्तीफे
TOI के अनुसार, इस्तीफे की शुरुआत यशवंतरायगौड़ा ने शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले की। उन्होंने विधान सौधा जाकर विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लमानी को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया।
इसके तुरंत बाद उनके समर्थकों ने बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है।
इसी तरह गोपालकृष्ण ने भी अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी में भाई-भतीजावाद और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
बयान
इस्तीफे के बाद क्या बोले यशवंतरायगौड़ा?
इस्तीफे के बाद यशवंतरायगौड़ा ने पार्टी आलाकमान पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा, "पार्टी आलाकमान और नेतृत्व ने मुझे गहरी मानसिक ठेस पहुंचाई है। मुझसे किया गया वादा पूरा करने में कांग्रेस विफल रही।"
उन्होंने कहा, "यह केवल कैबिनेट बर्थ का मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से पार्टी जिस तरह से काम कर रही है, वह बेहद निराशाजनक है। इसी वजह से मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। अब पीछे मुड़कर नहीं देखा जाएगा।"
बयान
गोपालकृष्ण ने क्या दिया बयान?
इस्तीफे के ऐलान के बाद गोपालकृष्ण ने पार्टी पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी में अब केवल पूर्व मुख्यमंत्रियों के बच्चों (बेटे-बेटियों) को ही प्रमुखता और महत्व दिया जाता है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार में जमीन पर काम करने वाले अनुभवी और जमीनी नेताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर इस्तीफे का ऐलान करना पड़ा है।
सफाई
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने क्या दी सफाई?
मंत्रिमंडल विस्तार की खुशी के बीच 2 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री शिवकुमार की तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "34 सदस्यीय राज्य कैबिनेट में केवल 20 सीटें ही खाली थीं, जिन्हें क्षेत्रीय, जातिगत और गुटीय संतुलन के आधार पर भरा गया है। सभी वरिष्ठों को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं था। सभी से धैर्य रखने का अनुरोध है। हम सभी के लिए अवसर पैदा करेंगे।"