महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का चुनाव आयोग को पत्र, ECINet सॉफ्टवेयर में बदलावों की मांग
क्या है खबर?
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और सॉफ्टवेयर नियंत्रण को लेकर चल रहे देशव्यापी विवाद के बीच एक बड़ा आंतरिक प्रशासनिक संकट सामने आया है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोकलिंगम ने केंद्रीय चुनाव आयोग को एक आधिकारिक पत्र लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में तत्काल चार बड़े बदलाव करने की मांग की है। यह कदम राज्य में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के नोटिस चरण के दौरान स्थानीय अधिकारियों की शक्तियां कम होने के बाद उठाया गया है।
परेशानी
ड्राफ्ट मतदाता लिस्ट से कटे 2 करोड़ से अधिक नाम
NDTV के अनुसार, महाराष्ट्र के CEO चोकलिंगम ने बताया कि SIR की प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र की प्रारंभिक मतदाता सूची से 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। हटाए गए नामों में से अधिकांश मतदाता या तो मृत हो चुके हैं या फिर वे उस स्थान से स्थानांतरित हो गए हैं।
31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में 21.1 प्रतिशत नाम कम हो गए हैं। इसकी अंतिम सूची 16 नवंबर को जारी की जानी है।
मांग
क्या हैं महाराष्ट्र के CEO की 4 मुख्य मांगें?
CEO चोकलिंगम ने मांग की है कि सॉफ्टवेयर के विकेंद्रीकरण की जरूरत है ताकि चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
उन्होंने प्रत्येक विधानसभा सीट के लिए जिम्मेदार स्थानीय उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को नोटिस चरण में मामलों को संभालने के लिए अधिक स्वतंत्र अधिकार देने की मांग की है।
इसी तरह सॉफ्टवेयर द्वारा चिह्नित 'तार्किक विसंगतियों' के मामलों में स्थानीय अधिकारियों को खुद सुनवाई कर की अनुमति दी जाए।
सवाल
'तार्किक विसंगति' क्या है?
सॉफ्टवेयर द्वारा चिह्नित यह कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं है कि कोई व्यक्ति मतदाता नहीं है। यह केवल एक डाटा का न मिलना है।
जब ECINet सॉफ्टवेयर किसी मतदाता के डाटा को पिछली सूची से मिलान करने का प्रयास करता है और यदि वहां माता-पिता, दादा-दादी के नाम की स्पेलिंग या उम्र के विवरण में कोई विसंगति पाई जाती है, तो सिस्टम उसे चिह्नित कर देता है।
ऐसे में उसकी तत्काल सुनवाई के साथ समाधान किए जाने की आवश्यकता है।
छूट
व्यक्तिगत सुनवाई से छूट की मांग
CEO चोकलिंगम ने पत्र में कहा है कि यदि कोई मतदाता अपनी प्रविष्टि के संबंध में पुख्ता और संतोषजनक दस्तावेज जमा कर देता है, तो ERO को यह अधिकार होना चाहिए कि वह उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में आकर गवाही देने से छूट दे सके।
सॉफ्टवेयर पर IT महानिदेशक स्तर के अत्यधिक केंद्रीकृत नियंत्रण को कम किया जाए और सॉफ्टवेयर में फील्ड अधिकारियों के लिए अधिक विकल्प और लचीलापन जोड़ा जाए।
मुहर
चुनाव आयुक्तों की पुरानी चेतावनियों पर लगी मुहर
चौंकाने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र के CEO ने अपने पत्र में उन्हीं चिंताओं को दोहराया है जिन्हें खुद चुनाव आयोग के 2 केंद्रीय चुनाव आयुक्तों (विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू) ने पहले ही उठाया था।
द इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से सामने आए विवरण के मुताबिक, चुनाव आयुक्त संधू ने 14 अगस्त को ही एक बेहद सख्त नोट लिखकर सॉफ्टवेयर का पूरा नियंत्रण IT महानिदेशक स्तर पर केंद्रित किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए थे।
सफाई
विरोध के बाद आयोग ने दी सफाई
इस बढ़ते आंतरिक विरोध को देखते हुए 26 सितंबर को आयोग की एक पूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।
उसके बाद आयोग ने महाराष्ट्र की मांगों को आंशिक रूप से स्वीकार करने का आश्वासन दिया था।
आयोग ने अब ERO को यह विवेकाधीन अधिकार दे दिया है कि वे तार्किक विसंगतियों के मामलों में सही दस्तावेज मिलने पर नागरिकों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट दे सकते हैं। ऐसे में अब यह पत्र फिर से सवाल उठा रहा है।
जानकारी
आयोग ने सॉफ्टवेयर में अपडेट करने का भी किया था दावा
आयोग ने दावा किया है कि राज्य के CEO की चिंताओं के आधार पर सॉफ्टवेयर में कई अपग्रेडेशन किए जा चुके हैं। अब फील्ड अधिकारियों को किसी लचीलेपन की आवश्यकता होगी, तो उसे तुरंत सॉफ्टवेयर में लागू कर दिया जाएगा।